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सुजलॉन एनर्जी के निवेशकों में हाहाकार! 1 साल में 40% टूटा शेयर, अब 52-वीक लो पर पहुँचा भाव; जानें अब क्या करें—होल्ड या सेल?

निवेशकों में हाहाकार मचा है! एक साल में करोड़ों डूबे, कंपनी कर्जमुक्त लेकिन नतीजे निराशाजनक। विशेषज्ञ बोले-70 रुपये का धमाका संभव या और गिरावट? जानें अंदर की सच्चाई, नुकसान से बचें!

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रिन्यूएबल ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयर निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। पिछले एक साल में शेयर का भाव लगभग 40 प्रतिशत लुढक चुका है और अब यह 52 सप्ताह के सबसे निचले स्तर के आसपास पहुंच गया है। वर्तमान में शेयर की कीमत करीब 44 रुपये के आसपास घूम रही है, जो मई 2025 के उच्चतम स्तर 74 रुपये से काफी नीचे है। इस गिरावट ने छोटे-बड़े निवेशकों में हड़कंप मचा दिया है। बाजार जानकारों का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं हुई, बल्कि कई आर्थिक और परिचालन चुनौतियों का परिणाम है।

सुजलॉन एनर्जी के निवेशकों में हाहाकार! 1 साल में 40% टूटा शेयर, अब 52-वीक लो पर पहुँचा भाव; जानें अब क्या करें—होल्ड या सेल?

क्यों लुढ़का शेयर का ग्राफ?

शेयर के लगातार गिरने के पीछे कई वजहें जुड़ी हैं। सबसे पहले तकनीकी कमजोरी ने असर दिखाया। शेयर प्रमुख औसत मूल्यों से नीचे ट्रेड कर रहा है और बाजार के संकेतक नकारात्मक दबाव बता रहे हैं। इसके अलावा कंपनी को भूमि अधिग्रहण, बिजली संचरण संबंधी बाधाओं और एक जुर्माने का सामना करना पड़ा, जिसने निवेशकों का भरोसा डगमगाया। बाजार में व्यापक सुधार और ऊंची मूल्यांकन की चिंता ने भी इस गिरावट को गति दी। नौ महीनों में 40 प्रतिशत की कमी ने शेयर को निचले समर्थन स्तर पर ला खड़ा किया, जहां से उबरना आसान नहीं लग रहा।

वित्तीय नतीजे क्या हैं?

कंपनी के ताजा तिमाही नतीजों पर गौर करें तो कुछ सकारात्मक पहलू दिखते हैं। हालिया तिमाही में राजस्व में सालाना आधार पर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई और कुल डिलीवरी में भी तेजी आई। नौ महीनों में विंड एनर्जी की आपूर्ति पिछले साल की तुलना में 66 प्रतिशत बढ़ी। कंपनी कर्ज मुक्त स्थिति में है और पूंजी पर रिटर्न का आंकड़ा प्रभावशाली बना हुआ है। लंबी अवधि के रिटर्न भी मजबूत हैं, जहां पांच सालों में कई गुना लाभ हुआ। हालांकि तिमाही आधार पर लाभ में कमी आई, जिससे बाजार ने सतर्क रुख अपनाया। ये आंकड़े बताते हैं कि बुनियादी ताकत बरकरार है, लेकिन अल्पकालिक चुनौतियां हावी हैं।

बाजार विश्लेषण, सपोर्ट और रेजिस्टेंस

तकनीकी नजरिए से शेयर निचले स्तर 42 रुपये के करीब है, जबकि ऊपरी बाधा 46-47 रुपये के दायरे में दिख रही है। यदि यह ऊंचाई तोड़ता है तो 48 रुपये का लक्ष्य बन सकता है, लेकिन वर्तमान गति कमजोर बनी हुई है। एक सप्ताह में चार प्रतिशत, तीन महीनों में करीब 20 प्रतिशत और पूरे साल में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। लंबी अवधि के आंकड़े हालांकि आशा जगाते हैं, जहां पांच सालों में 742 प्रतिशत का रिटर्न हासिल हुआ।

विशेषज्ञों की राय क्या है?

जानकारों के मत बंटे हुए हैं। कुछ का कहना है कि रिन्यूएबल ऊर्जा के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए लंबी अवधि के लिए रखें, क्योंकि भारत के नेट जीरो लक्ष्य से फायदा होगा। लक्ष्य मूल्य 70 रुपये से ऊपर बताए जा रहे हैं। वहीं अन्य ऊंची कीमतों के जोखिम की ओर इशारा करते हुए बिकवाली की सलाह दे रहे हैं। कुल मिलाकर मजबूत खरीदारी का माहौल है, लेकिन छोटी अवधि में सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेशक अपनी जोखिम सहनशीलता के आधार पर फैसला लें।

समयावधिरिटर्न
1 सप्ताह-4 प्रतिशत
1 माह-3 प्रतिशत
3 माह-20 प्रतिशत
1 वर्ष-20 प्रतिशत
5 वर्ष+742 प्रतिशत

रिन्यूएबल क्षेत्र की तेजी के बावजूद सुजलॉन को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। निवेश से पहले सलाहकार से बात करें, क्योंकि बाजार में हमेशा जोखिम रहता है।

Author
info@ortpsa.in

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