
भारत में इस साल गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त होने की कगार पर हैं, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञों ने ‘सुपर अल-नीनो’ को लेकर एक डराने वाली चेतावनी जारी की है, वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में पैदा हो रही यह भौगोलिक हलचल भारत में ‘जानलेवा गर्मी’ का कारण बन सकती है।
यह भी देखें: दिल्ली-NCR के इन गांवों में आएगा बदलाव! 100 KM लंबी नई सड़कों का जाल; 40 हजार लोगों को मिलेगी जाम से मुक्ति
Table of Contents
क्या है ‘सुपर अल-नीनो’ का खतरा?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाता है, तो उसे ‘सुपर अल-नीनो’ कहा जाता है, यह स्थिति वैश्विक स्तर पर हवाओं के रुख को बदल देती है, जिससे भारत जैसे देशों में मानसून कमजोर पड़ता है और भीषण लू (Heatwave) का प्रकोप बढ़ जाता है।
मौसम विभाग की चेतावनी के मुख्य बिंदु
- रिकॉर्ड तोड़ तापमान: IMD के मुताबिक, साल 2026 के गर्मियों के सीजन में औसत तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है, कई राज्यों में पारा 48-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है।
- हीटवेव का लंबा दौर: उत्तर और मध्य भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, दिल्ली, यूपी, हरियाणा और मध्य प्रदेश में इस बार सामान्य से 10 से 15 दिन अधिक लू चलने का अनुमान है।
- मार्च से ही दिखने लगा असर: मार्च के शुरुआती हफ्तों में ही तापमान सामान्य से 5 से 8 डिग्री तक अधिक दर्ज किया गया है, जो आने वाली भीषण गर्मी का ट्रेलर माना जा रहा है।
जनजीवन और खेती पर संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि सुपर अल-नीनो न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और खेती पर भी सीधा प्रहार करेगा। मानसून में देरी या कम बारिश के कारण खरीफ की फसलों पर संकट मंडरा सकता है। वहीं, बिजली और पानी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है।
यह भी देखें: IPL के असली ‘किंग’ कौन? सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले टॉप 5 खिलाड़ियों में विराट नहीं, ये खिलाड़ी है नंबर 1
बचाव के लिए क्या करें?
सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने, अधिक पानी पीने और ढीले सूती कपड़े पहनने की सलाह दी है, ‘सुपर अल-नीनो’ का यह साया आने वाले कुछ महीनों तक भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाला है।
















