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शेयर बाजार गिरते ही क्यों ‘रॉकेट’ बन जाता है सोना? जानें बुरे वक्त में गोल्ड को क्यों कहा जाता है ‘असली खजाना’ और निवेश का सही समय

 ग्लोबल मार्केट में मची हलचल और घरेलू शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर 'पीली धातु' यानी सोने पर टिका है, जैसे-जैसे सेंसेक्स और निफ्टी के ग्राफ नीचे गिर रहे हैं, सोने की कीमतें 'रॉकेट' की रफ्तार से ऊपर भाग रही हैं, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता के इस दौर में सोना न केवल एक निवेश है, बल्कि निवेशकों के लिए 'असली खजाना' साबित हो रहा है

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शेयर बाजार गिरते ही क्यों 'रॉकेट' बन जाता है सोना? जानें बुरे वक्त में गोल्ड को क्यों कहा जाता है 'असली खजाना' और निवेश का सही समय
शेयर बाजार गिरते ही क्यों ‘रॉकेट’ बन जाता है सोना? जानें बुरे वक्त में गोल्ड को क्यों कहा जाता है ‘असली खजाना’ और निवेश का सही समय

 ग्लोबल मार्केट में मची हलचल और घरेलू शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर ‘पीली धातु’ यानी सोने पर टिका है, जैसे-जैसे सेंसेक्स और निफ्टी के ग्राफ नीचे गिर रहे हैं, सोने की कीमतें ‘रॉकेट’ की रफ्तार से ऊपर भाग रही हैं, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता के इस दौर में सोना न केवल एक निवेश है, बल्कि निवेशकों के लिए ‘असली खजाना’ साबित हो रहा है। 

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बाजार गिरते ही सोने में तेजी क्यों?

शेयर बाजार और सोने के बीच विपरीत संबंध (Inverse Relationship) जगजाहिर है, जब अर्थव्यवस्था में सुस्ती आती है या भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) बढ़ता है, तो निवेशक जोखिम वाले एसेट्स (जैसे शेयर) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की तलाश करते हैं।

  • सोने को सदियों से दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश माना गया है युद्ध या वैश्विक मंदी जैसी स्थितियों में जब मुद्रा (Currency) की वैल्यू गिरने लगती है, तब सोना अपनी चमक बरकरार रखता है।
  • महंगाई बढ़ने पर अक्सर करेंसी की क्रय शक्ति कम हो जाती है, लेकिन सोने की कीमतें आम तौर पर बढ़ती हैं, जिससे यह मुद्रास्फीति के खिलाफ एक ढाल (Hedge) का काम करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का सीधा मुकाबला डॉलर से होता है, जब डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोने की मांग बढ़ जाती है, जिससे इसकी कीमतों में उछाल आता है।

‘असली खजाना’ और पोर्टफोलियो का रक्षा कवच

बुरे वक्त में सोने को ‘असली खजाना’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह किसी कंपनी की बैलेंस शीट या सरकार की नीतियों पर निर्भर नहीं होता संकट के समय जब बैंक या शेयर बाजार अस्थिर हों, तब सोना आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस करने में मदद करता है। 

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निवेश का क्या है सही समय? (मार्च 2026 अपडेट)

ताजा आंकड़ों और बाजार विशेषज्ञों की राय के अनुसार, सोने में निवेश के लिए ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट पर खरीदें) की रणनीति सबसे कारगर है: 

  • विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $5,000 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है।
  •  जनवरी 2026 में सोने की कीमतें पहले ही ₹1.39 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुँच चुकी हैं, और कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ₹1.60 लाख से ₹1.80 लाख तक जा सकता है।
  • वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि एकमुश्त निवेश के बजाय गोल्ड ईटीएफ (ETF) या डिजिटल गोल्ड के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। 

शेयर बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए अपने कुल पोर्टफोलियो का कम से कम 5% से 10% हिस्सा सोने में रखना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। 

Stock Market Crashes Yet Gold Prices Rise
Author
info@ortpsa.in

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