
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है, आयोग ने अपनी चयन प्रक्रिया में ‘स्लाइडिंग मैकेनिज्म’ (Sliding Mechanism) लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे आम भाषा में ‘फिक्स-फ्लोट’ नियम कहा जा रहा है, यह नई व्यवस्था मुख्य रुप से 2026 की भर्तियों से प्रभावी होगी, जिससे अब उम्मीदवारों को अपनी पसंद का पद और विभाग चुनने की अधिक आजादी मिलेगी।
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क्या है ‘फिक्स’ और ‘फ्लोट’ का गणित?
अब तक SSC में एक बार पद आवंटित होने के बाद उसे बदलना नामुमकिन होता था, लेकिन नई नीति के तहत प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- फिक्स (Fix): यदि अभ्यर्थी को उसकी पसंद का पद मिल जाता है, तो वह ‘फिक्स’ विकल्प चुनकर अपनी सीट लॉक कर सकता है इसके बाद उसका चयन अंतिम माना जाएगा।
- फ्लोट (Float): यदि अभ्यर्थी को आवंटित पद से बेहतर पद (हायर प्रेफरेंस) की उम्मीद है, तो वह ‘फ्लोट’ विकल्प चुन सकता है इससे अभ्यर्थी की वर्तमान सीट सुरक्षित रहेगी, लेकिन मेरिट के आधार पर ऊपर की सीटें खाली होने पर उसे बेहतर पद आवंटित कर दिया जाएगा।
लाखों युवाओं को कैसे होगा फायदा?
- वेटिंग लिस्ट का खत्म होगा झंझट: पहले कई अभ्यर्थी चयन के बाद ज्वाइन नहीं करते थे, जिससे पद खाली रह जाते थे, अब ‘फ्लोट’ विकल्प के जरिए उन खाली पदों को उसी भर्ती चक्र में मेरिट वाले उम्मीदवारों से भर दिया जाएगा।
- मनपसंद विभाग की गारंटी: अच्छे अंक लाने के बावजूद कई बार तकनीकी कारणों से उम्मीदवार मनचाहा विभाग नहीं पा पाते थे, अब अपग्रेडेशन के जरिए उन्हें बेहतर मौका मिलेगा।
- पारदर्शिता और आधार वेरिफिकेशन: इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य किया है।
इन परीक्षाओं पर पड़ेगा सीधा असर
आयोग के मुताबिक, यह नियम SSC CGL 2026, CHSL 2026 और उसके बाद आने वाली अन्य प्रमुख परीक्षाओं पर लागू होगा। हालांकि, अभ्यर्थियों को सावधानी बरतनी होगी क्योंकि स्लाइडिंग का मौका केवल एक बार ही दिया जाएगा।
यह कदम न केवल भर्ती प्रक्रिया को आधुनिक बनाएगा, बल्कि सरकारी सेवाओं में पदों की बर्बादी को रोकने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
















