ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए एक नया वायरल दावा सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है। दावा है कि केंद्र सरकार गरीब महिलाओं को मुफ्त सोलर ऊर्जा वाली आटा चक्की दे रही है। इससे न सिर्फ बिजली बिल की चिंता खत्म होगी, बल्कि घर बैठे कमाई भी शुरू हो जाएगी। लेकिन यह खुशखबरी नहीं, बल्कि ठगों का सुनियोजित जाल है। आधिकारिक जाँच में साबित हो चुका है कि ऐसी कोई योजना अस्तित्व में नहीं है।

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वायरल दावे की चमक-दमक
सोशल मीडिया पोस्ट्स और छोटे-छोटे वीडियो में चमकदार तस्वीरें दिखाई जाती हैं। सोलर पैनल से चलने वाली चक्की घर की छत पर लगी हुई, आटा तेजी से पीस रही है। दावा किया जाता है कि यह योजना नवीन ऊर्जा मंत्रालय की है। ग्रामीण महिलाएँ, जिनके पास राशन कार्ड है और परिवार की सालाना आय दो लाख पचास हजार से कम है, वे आवेदन कर सकती हैं।
फॉर्म भरते ही मुफ्त चक्की घर पहुँच जाएगी। पड़ोसियों को आटा पीसने की सेवा देकर रोजाना पाँच सौ से हजार रुपये तक कमाई का लालच दिया जाता है। कई वीडियो में दिखाया जाता है कि महिलाएँ खुश होकर चक्की चला रही हैं, बिजली बिल जीरो हो गया। यह दावा 2024 से बार-बार उभरता रहा, लेकिन हर बार खारिज हो गया।
हकीकत का कड़वा सच
सरकार की ओर से बार-बार स्पष्ट किया गया है कि फ्री सोलर आटा चक्की जैसी कोई योजना नहीं चल रही। ये वायरल संदेश लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों को निशाना बनाते हैं। गाँवों में आटा पीसना महिलाओं का दैनिक संघर्ष है। सुबह से शाम तक घंटों लगते हैं, बिजली कटौती और ऊँचे बिल जोड़कर समस्या और गंभीर हो जाती है।
ठग इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं। फॉर्म भरवाने के नाम पर आधार नंबर, मोबाइल, बैंक डिटेल्स माँगे जाते हैं। एक बार जानकारी हाथ लगी, तो लोन के नाम पर उगाही या खाते खाली कर दिए जाते हैं। ऐसे फर्जी लिंक वाली वेबसाइटें दिखने में आधिकारिक लगती हैं, लेकिन इनका कोई सरकारी संबंध नहीं।
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ठगों की चालाकी
ये स्कैमर भावनाओं से खेलते हैं। महिलाओं को सशक्तिकरण का सपना दिखाते हैं, घर से स्वरोजगार की बात करते हैं। लेकिन मकसद सिर्फ डेटा चोरी है। साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे जाल ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा प्रभावी होते हैं, क्योंकि वहाँ डिजिटल साक्षरता कम है। वीडियो थंबनेल आकर्षक बनाए जाते हैं, जिसमें सरकारी लोग या सोलर चक्की की तस्वीरें होती हैं। लोग बिना सोचे लिंक पर क्लिक कर लेते हैं। नतीजा, पहचान चोरी या आर्थिक नुकसान। कई मामले सामने आए हैं जहाँ महिलाएँ फँसकर परेशान हुईं।
असली सरकारी मदद
फ्री चक्की का सपना भले ही झूठा हो, लेकिन सोलर ऊर्जा पर सरकार की वास्तविक योजनाएँ मौजूद हैं। रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने पर भारी सब्सिडी मिलती है। इससे घर की बिजली जरूरतें पूरी हो सकती हैं, अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी। यह योजना लाखों घरों तक पहुँची है, बिजली बिल काफी कम हो गए। आवेदन आधिकारिक वेबसाइट पर ही करें। सोलर उपकरणों पर सब्सिडी अलग-अलग है, लेकिन मुफ्त वितरण कहीं नहीं। ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाएँ जैसे उड़ान या मुद्रा लोन वास्तविक सहारा हैं।
जागरूक रहें, बचाव करें
ऐसे दावों पर भरोसा न करें। कोई भी योजना जाँचें तो सिर्फ gov.in वाली साइट्स देखें। फॉर्म भरने से पहले हेल्पलाइन पर बात करें। वायरल मैसेज फॉरवर्ड न करें। अगर ठगी हो जाए, तो नजदीकी पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दर्ज करें। ग्रामीण महिलाएँ मजबूत हैं, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। फर्जी खुशखबरी के चक्कर में न फँसें, असली अवसरों को अपनाएँ। सतर्कता से ही सच्चा सशक्तिकरण संभव है।
















