
केंद्र सरकार ने सिम-बाइंडिंग नियमों में कोई ढील न देने का स्पष्ट संकेत दे दिया है। 1 मार्च से WhatsApp, Telegram और Signal जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स बिना एक्टिव SIM कार्ड के काम नहीं करेंगे। दूरसंचार विभाग (DoT) के इस सख्त निर्देश से करोड़ों भारतीय यूजर्स प्रभावित होंगे, खासकर वे जो वाई-फाई पर बिना SIM के ऐप चलाते हैं। कंप्यूटर यूजर्स के लिए भी नया नियम लागू होगा, जहां WhatsApp Web हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट हो जाएगा। यह कदम साइबर फ्रॉड और फर्जी नंबरों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
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सरकार की पुष्टि: कोई ढील नहीं
सरकार की पुष्टि के बाद अब कोई बहाना नहीं बचेगा। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि DoT ने नवंबर 2025 में ही मैसेजिंग ऐप कंपनियों को यह फीचर लागू करने का आदेश दिया था। 28 फरवरी की मूल डेडलाइन बढ़ाने से इनकार कर दिया गया है। WhatsApp ने बीटा वर्जन 2.26.8.6 में सिम-बाइंडिंग से जुड़ा पॉप-अप दिखाना शुरू कर दिया है, जो WA Beta Info ने अपने X अकाउंट पर शेयर किया। इसमें साफ लिखा है: “भारत सरकार के आदेशानुसार, अकाउंट एक्सेस के लिए रजिस्टर्ड नंबर का SIM फोन में लगाएं।” इसका मतलब साफ है – SIM निकालते ही ऐप लॉगआउट हो जाएगा।
सिम बाइंडिंग का पूरा मतलब
सिम बाइंडिंग क्या है? सरल शब्दों में, यह एक तकनीकी व्यवस्था है जो ऐप अकाउंट को फोन के अंदर मौजूद एक्टिव SIM कार्ड से जोड़ती है। DoT का तर्क है कि भारत में लाखों यूजर्स बिना SIM के फोन में दूसरे नंबरों के WhatsApp या Telegram अकाउंट चलाते हैं। इससे स्कैमर फर्जी अकाउंट बनाकर फ्रॉड करते हैं। सिम बाइंडिंग से हर अकाउंट सत्यापित हो जाएगा। Telegram और Signal पर यह समस्या और गंभीर है, जहां यूजर्स अक्सर अनलिमिटेड अकाउंट्स मैनेज करते हैं। 1 मार्च के बाद कोई भी इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप बिना SIM के चलेगा ही नहीं।
कंप्यूटर यूजर्स के लिए नया नियम
यह नियम केवल मोबाइल तक सीमित नहीं। WhatsApp Web या डेस्कटॉप यूजर्स को हर 6 घंटे में सेशन रीसेट करना पड़ेगा। DoT के आदेशानुसार, कंप्यूटर पर लिंक्ड डिवाइस का सेशन इतने ही समय बाद समाप्त हो जाएगा। फिर मोबाइल ऐप से QR कोड स्कैन करके दोबारा लिंक करना होगा, और मोबाइल में SIM अनिवार्य रहेगा। पुराने एक्सटेंशन या थर्ड-पार्टी टूल्स अब काम नहीं करेंगे। इससे प्रोफेशनल्स और डेस्कटॉप यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी होगी।
WhatsApp का तेज अमल
WhatsApp सबसे तेज अमल कर रहा है। बीटा टेस्टर्स ने पॉप-अप देखा, जिसमें चेतावनी दी गई है कि SIM न होने पर अकाउंट एक्सेस ब्लॉक हो जाएगा। Navbharat Times की रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp DoT के निर्देशों का पालन तेजी से कर रहा है। Telegram और Signal को भी इसी महीने फीचर रोलआउट करना होगा। गैर-अमल पर जुर्माना या ऐप ब्लॉकिंग की धमकी दी गई है। भारत में 50 करोड़ से ज्यादा WhatsApp यूजर्स हैं, जिनमें से 20-30% बिना SIM के चलाते हैं। ग्रामीण इलाकों में यह संख्या और ऊंची है।
यूजर्स के लिए जरूरी सलाह
यूजर्स को क्या करना चाहिए? सबसे पहले, अपना रजिस्टर्ड नंबर का SIM फोन में रखें। अगर ड्यूल-सिम फोन है, तो प्राइमरी SIM ही चलेगा। वाई-फाई पर भी अब SIM वैलिडेशन होगा। बैकअप चैट्स क्लाउड पर सुरक्षित रखें, क्योंकि लॉगआउट के बाद रिस्टोर आसान रहेगा। कंप्यूटर यूजर्स को 6 घंटे के अंतराल पर लिंकिंग की आदत डालनी होगी।
फायदे vs नुकसान का विश्लेषण
सकारात्मक पक्ष साफ है – साइबर क्राइम 40-50% कम हो सकता है। RBI और CERT-In की रिपोर्ट्स बताती हैं कि फर्जी WhatsApp अकाउंट्स से सालाना 10,000 करोड़ का फ्रॉड होता है। लेकिन यूजर्स के लिए असुविधा तय है। ट्रैवलर्स, सेकेंडरी फोन यूजर्स या जेलब्रेक डिवाइस वालों को दिक्कत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि 1-2 महीने में यूजर्स अभ्यस्त हो जाएंगे।
डिजिटल इंडिया का नया कदम
सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा है। लेकिन क्या बिना ट्रेनिंग के इतना बड़ा बदलाव संभव? समय ही बताएगा। फिलहाल, 1 मार्च से पहले तैयारी करें – अन्यथा आपका फेवरेट ऐप ‘सिम-लेस’ हो जाएगा!
















