
जिले के निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है, जिलाधिकारी (DM) मनीष कुमार बंसल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में यदि किसी स्कूल ने फीस, किताबों या यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों पर दबाव बनाया, तो उन पर ₹1 लाख का भारी जुर्माना लगाया जाएगा इतना ही नहीं, नियमों के बार-बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
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कमीशनखोरी के खेल पर लगेगी लगाम
अक्सर देखा जाता है कि स्कूल किसी खास दुकान से महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करते हैं। इस ‘कमीशनखोरी’ को खत्म करने के लिए प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं:
- दुकानों की बाध्यता खत्म: अब स्कूल किसी विशेष विक्रेता से सामान खरीदने का दबाव नहीं बना पाएंगे। अभिभावक अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी यूनिफॉर्म और किताबें खरीद सकेंगे।
- 3 साल तक नहीं बदलेगी यूनिफॉर्म: स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे कम से कम तीन साल तक ड्रेस में कोई बदलाव न करें, ताकि पुराने छात्रों पर हर साल नया खर्च न थोपा जाए।
- ऑनलाइन उपलब्धता: स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर किताबों की सूची सार्वजनिक करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे Amazon या Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हों।
फीस वृद्धि के लिए 60 दिन पहले देनी होगी जानकारी
उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विद्यालय फीस वृद्धि विनियम अधिनियम के तहत, स्कूलों को सत्र शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले अपना फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक करना अनिवार्य है। वर्तमान में, नियम तोड़ने वाले लगभग 60 स्कूलों को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
शिकायत पर ‘श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल’ को चेतावनी
हाल ही में ‘श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल’ द्वारा LKG की किताबों के लिए ₹8,000 वसूलने और विशेष दुकान से खरीदने का दबाव बनाने की शिकायत मिली थी। इस पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए स्कूल को नोटिस थमाया है, संतोषजनक जवाब न मिलने पर स्कूल पर ₹5 लाख तक का जुर्माना और मान्यता निरस्तीकरण की तलवार लटक सकती है।
अभिभावक यहाँ करें शिकायत
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि कोई स्कूल एनडीईआरटी (NCERT) की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो वे तुरंत जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।
















