केंद्र सरकार ने जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव कर दिया है। अब एक साल से अधिक पुराने जन्मों के मामलों में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। यह 20 साल पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह पलटने वाला कदम है, जिससे लाखों परिवारों की राहत की उम्मीदें कम हो सकती हैं।

पहले ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) या सर्कल इंस्पेक्टर के साधारण आदेश से जन्म प्रमाण पत्र बन जाता था। लेकिन फर्जी दस्तावेजों की भरमार और सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यह सख्ती लाई गई। पटना के डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी जिलों के रजिस्ट्रारों और SDM को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना उच्च स्तरीय सत्यापन के कोई प्रमाण पत्र न जारी हो। सुप्रीम कोर्ट के 1 फरवरी 2026 के फैसले ने भी इन नियमों को कानूनी ठहरावा दिया, जिसमें डिजिटल वेरिफिकेशन और आधार लिंकिंग पर जोर दिया गया।
Table of Contents
नए नियमों का आधार
यह बदलाव फर्जी प्रमाण पत्रों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से आया है। स्कूल एडमिशन से लेकर पासपोर्ट, राशन कार्ड और पीएम किसान जैसी योजनाओं तक हर जगह जन्म प्रमाण पत्र की मांग होती है। पुरानी प्रणाली में बिना पुख्ता सबूत के सर्टिफिकेट जारी हो जाते थे, जिससे विवाद और कानूनी पचड़े बढ़ते थे। अब SDM स्तर का हस्तक्षेप सिस्टम को पारदर्शी बनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल जालसाजी रुकेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया अभियान को भी बल मिलेगा। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में SDM कार्यालयों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होगा।
समयसीमा के अनुसार बदलाव
नियम तीन श्रेणियों में बांटे गए हैं। सबसे पहले, जन्म के 21 दिनों के भीतर आवेदन करने पर कोई अतिरिक्त मंजूरी नहीं चाहिए। अस्पताल की रिपोर्ट या आंगनवाड़ी रिकॉर्ड के साथ crsorgi.gov.in पोर्टल पर सीधे आवेदन कर सकते हैं। दूसरा, 21 दिन से एक साल तक की देरी पर जिला रजिस्ट्रार की अनुमति और मामूली शुल्क देना पड़ेगा। तीसरा और सबसे कठिन, एक साल बाद के मामलों में SDM या डीएम से परमिशन लेनी अनिवार्य है। यहां हलफनामा, दो स्थानीय गवाहों के शपथ-पत्र, माता-पिता के आधार-पैन कार्ड, स्कूल प्रमाणपत्र या पुराने रिकॉर्ड जमा करने पड़ेंगे। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी 30 दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट या कोर्ट ऑर्डर जरूरी होगा।
आवेदन की नई प्रक्रिया
प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए crsorgi.gov.in पोर्टल मुख्य केंद्र है। नवजात के जन्म पर तुरंत अस्पताल से रिपोर्ट लें और ऑनलाइन अपलोड करें। देरी होने पर SDM दफ्तर जाएं, जहां सत्यापन के बाद अनुमति मिलेगी। फिर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास अंतिम प्रमाण पत्र बनवाएं। ट्रैकिंग सुविधा से आवेदन की स्थिति घर बैठे चेक करें। शहरी क्षेत्रों में प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी और ग्रामीण इलाकों में पंचायत सचिव प्रारंभिक जांच करेंगे। सरकार ने जागरूकता अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि लोग समय पर कार्रवाई करें।
प्रभाव और चुनौतियां
यह बदलाव बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा असर डालेगा, जहां देरी से प्रमाण पत्र बनवाने की प्रवृत्ति आम है। ग्रामीण परिवारों को SDM कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, जिससे समय और पैसे की बर्बादी होगी। लेकिन लंबे समय में फायदा साफ है – सरकारी लाभों का सही वितरण होगा और नागरिकता साबित करना आसान पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, स्कूल एडमिशन के लिए अब फर्जी उम्र छिपाना मुश्किल हो जाएगा।
क्या करें आम नागरिक?
नवजात के जन्म के तुरंत बाद प्रमाण पत्र बनवाएं। सभी दस्तावेज जैसे आधार, अस्पताल स्लिप, स्कूल रिकॉर्ड संभालकर रखें। देरी से पहले SDM से संपर्क करें। सरकार की ओर से जल्द ही हेल्पलाइन और मोबाइल वैन की व्यवस्था हो सकती है। यह बदलाव चुनौतीपूर्ण लगता है, लेकिन पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम है। समय रहते तैयारी करें, वरना सरकारी कामकाज में अटकाव हो सकता है।
















