
स्वतंत्र भारत में राजशाही का दौर भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन कई पूर्व राजघराने आज भी अपनी अपार संपत्ति और शाही ठाठ-बाट से सुर्खियों में बने रहते हैं। मेवाड़ से जोधपुर, जयपुर से बड़ौदा तक, ये परिवार महलों को लग्जरी होटलों में बदलकर, पर्यटन और रियल एस्टेट से कमाई कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनकी कुल संपत्ति हजारों करोड़ में आंकी जाती है, जो आम आदमी को हैरान कर देती है। इस रिपोर्ट में हम डीप रिसर्च के आधार पर टॉप राजघरानों की संपत्ति, स्रोत और वर्तमान स्थिति पर नजर डालेंगे।
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मेवाड़ राजघराना
राजस्थान का मेवाड़ परिवार भारत का सबसे धनी राजघराना माना जाता है। महाराणा लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के नेतृत्व में इसकी संपत्ति ₹50,000 करोड़ से अधिक बताई जाती है। उदयपुर का सिटी पैलेस और ताज लेक पैलेस जैसे ऐतिहासिक महल आज HRH ग्रुप ऑफ होटल्स का हिस्सा हैं, जो पर्यटकों से भारी कमाई करते हैं। परिवार की आय का मुख्य स्रोत विरासत संपत्तियां, ज्वेलरी कलेक्शन और हॉस्पिटैलिटी बिजनेस है। मेवाड़ की यह दौलत महाराणा प्रताप की परंपरा को जीवंत रखती है, जहां शाही जीवनशैली के साथ आधुनिक व्यवसाय का मिश्रण है।
गायकवाड़ ऑफ बड़ौदा
गुजरात के बड़ौदा के गायकवाड़ परिवार की संपत्ति ₹25,000 करोड़ के आसपास है। इस शाही वंश ने लक्ष्मी विलास पैलेस को हेरिटेज होटल में तब्दील कर लिया है, जो दुनिया के सबसे बड़े निजी निवासों में शुमार है। संपत्ति में रियल एस्टेट, शेयर बाजार निवेश और पारंपरिक व्यवसाय शामिल हैं। हाल के वर्षों में परिवार ने पर्यटन को बढ़ावा दिया है, जिससे उनकी कमाई में इजाफा हुआ। इंस्टाग्राम हैंडल upscworldofficial के अनुसार, यह परिवार शाही जिंदगी जीते हुए भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय है।
जोधपुर रॉयल फैमिली:
जोधपुर के महाराजा गज सिंह द्वितीय का परिवार ₹22,000 करोड़ का मालिक है। उम्मेद भवन पैलेस, जो दुनिया का सबसे बड़ा प्राइवेट होटल है, उनकी प्रमुख संपत्ति है। ताज ग्रुप के सहयोग से इसका एक हिस्सा लग्जरी रिसॉर्ट चला रहा है, जबकि बाकी परिवार का निजी निवास है। मेहरानगढ़ किले से होने वाली आय और रियल एस्टेट ने इसे मजबूत बनाया। upscworldofficial की पोस्ट में इसे टॉप लिस्ट में शामिल किया गया, जो इसकी लोकप्रियता दर्शाता है।
जयपुर राजपरिवार
जयपुर के महाराजा पद्मनाभ सिंह के परिवार की संपत्ति ₹20,000 से ₹22,000 करोड़ तक अनुमानित है। सिटी पैलेस, जयगढ़ किला और आमेर किला पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। परिवार ने ज्वेलरी ब्रांड और फैशन लाइन शुरू की है, जो युवा पीढ़ी को जोड़ती है। upscworldofficial ने इसे हाइलाइट किया, जहां शाही शादियां और पोलो मैच उनकी चमक बढ़ाते हैं। रियल एस्टेट दिल्ली-एनसीआर में भी फैला है।
अन्य प्रमुख राजघराने
- राजकोट रॉयल फैमिली: ₹20,000 करोड़ की संपत्ति के साथ गुजरात का यह परिवार तेजी से उभर रहा। विरासत महल और कृषि भूमि मुख्य स्रोत।
- वाडियार ऑफ मैसूर: ₹10,000 करोड़ से अधिक। मैसूर पैलेस और सिल्क उद्योग से कमाई। दशहरा उत्सव पर्यटन को आकर्षित करता है।
- त्रावणकोर राजपरिवार: केरल का यह परिवार ₹10,000 करोड़ का मालिक। पद्मनाभस्वामी मंदिर की संपत्ति विवादास्पद रही, लेकिन निजी ज्वेलरी और निवेश मजबूत।
- अलसिसर राजघराना: ₹3,000 करोड़। राजस्थान का यह छोटा लेकिन समृद्ध परिवार हेरिटेज होटलों से कमाता।
संपत्ति के स्रोत और चुनौतियां
ये राजघराने महलों को UNESCO साइट्स और 5-स्टार होटलों में बदलकर जीवित हैं। ताज, ITC और ओबरॉय जैसे ग्रुप उनके पार्टनर हैं। हालांकि, मेंटेनेंस, कानूनी विवाद और टैक्स चुनौतियां बनी हुई हैं। 1971 के प्रिंसेसली प्रिवी पर्स एक्ट के बाद इन्होंने बिजनेस मॉडल अपनाया।
| राजघराना | संपत्ति (₹ करोड़) | मुख्य स्रोत |
|---|---|---|
| मेवाड़ | 50,000+ | होटल, पैलेस पर्यटन |
| गायकवाड़ | 25,000 | रियल एस्टेट, निवेश |
| जोधपुर | 22,000 | उम्मेद भवन होटल |
| जयपुर | 20,000-22,000 | किले, ज्वेलरी |
| राजकोट | 20,000 | भूमि, हेरिटेज |
| मैसूर | 10,000+ | पैलेस, सिल्क |
















