
आजकल बाहर खाना खाना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक शौक भी बन गया है। परिवार के साथ डिनर हो, दोस्तों के साथ पार्टी हो या ऑफिस की मीटिंग, लोग अक्सर रेस्तरां का रुख करते हैं। लेकिन स्वादिष्ट खाने के बाद जब बिल सामने आता है, तो उसमें GST के साथ-साथ सर्विस चार्ज भी जुड़ा दिखता है। यह सर्विस चार्ज कई बार 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत या उससे ज्यादा तक होता है, जिससे कुल बिल आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाता है। अक्सर ग्राहक यह सोचकर भुगतान कर देते हैं कि शायद यह देना जरूरी है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कानून साफ कहता है कि रेस्तरां किसी भी ग्राहक से सर्विस चार्ज जबरन नहीं ले सकता।
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दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहनिक फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में मार्च 2025 में एक ऐतिहनिक फैसला सुनाया, जिसमें केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की गाइडलाइंस को सही ठहराया गया। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की बेंच ने कहा कि होटल और रेस्तरां अपने बिल में अपने मनमाने ढंग से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते। यह पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह सर्विस चार्ज देना चाहता है या नहीं। कोर्ट ने इसे ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया और स्पष्ट किया कि सर्विस चार्ज या टिप देना वैकल्पिक है। जबरदस्ती वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।
नया नियम क्या कहता है?
2022 में CCPA ने सर्विस चार्ज पर सख्त दिशानिर्देश जारी किए थे, जिन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। इन गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि बिल में सर्विस चार्ज अपने-आप नहीं जोड़ा जा सकता। इसे ‘जरूरी’ या ‘अनिवार्य’ बताना भ्रामक और गैरकानूनी है। मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने भी पुष्टि की कि ग्राहक पर कोई अतिरिक्त शुल्क जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता।
रेस्तरां एसोसिएशन जैसे नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) और FHRAI ने इसका विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने ग्राहक हितों को प्राथमिकता दी। अब मेनू कार्ड और बिल में साफ लिखना होगा कि सर्विस चार्ज वैकल्पिक है।
जुर्माने की सजा का डर
नियम तोड़ने वाले रेस्तरां पर सख्त कार्रवाई हो रही है। CCPA ने जनवरी 2026 तक 27 रेस्तरां पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया है। उल्लंघन पर अतिरिक्त कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं, जैसे लाइसेंस रद्द या कोर्ट केस। फरवरी 2026 तक सरकार सक्रिय निगरानी कर रही है, और सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान चल रहे हैं। यह स्टाफ वेलफेयर के नाम पर ग्राहकों की जेब काटने की पुरानी प्रथा पर लगाम लगाएगा।
शिकायत का आसान तरीका
अगर बिल में जबरन सर्विस चार्ज जोड़ा जाए, तो सबसे पहले रेस्तरां प्रबंधन से इसे हटाने की मांग करें। साफ कहें कि आप वैकल्पिक टिप नहीं देना चाहते। अगर मना करें, तो तुरंत शिकायत करें:
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH): 1915 पर कॉल या NCH ऐप डाउनलोड कर दर्ज करें।
- ऑनलाइन पोर्टल: edaakhil.nic.in या com-ccpa@nic.in पर ईमेल।
- कंज्यूमर कोर्ट: जिला उपभोक्ता आयोग में केस, बिल कॉपी और पेमेंट प्रूफ संलग्न कर।
शिकायत के साथ फोटो या बिल की स्कैन कॉपी रखें। कई मामलों में तुरंत सुधार हो जाता है।
ग्राहकों के लिए नई ताकत
यह फैसला लाखों ग्राहकों को सशक्त बनाएगा। अब बिल चेक करना आदत डालें और अपने अधिकार जानें। रेस्तरां मालिकों को भी अब पारदर्शिता अपनानी होगी।
















