सोशल मीडिया पर वायरल एक पुरानी धारणा फिर से जोर पकड़ रही है, सुबह-सुबह पेट्रोल भरवाने से ज्यादा ईंधन मिलता है। ठंडे मौसम में पेट्रोल की डेंसिटी बढ़ जाती है, जिससे एक लीटर में अधिक मात्रा हाथ लगती है। लाखों ड्राइवर इस ‘राज’ पर यकीन कर सुबह पंपों पर लाइन लगा देते हैं, लेकिन क्या यह दावा वैज्ञानिक रूप से सही है? एक गहन पड़ताल से पता चलता है कि यह महज मिथक है, जो उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहा है।

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आधुनिक पंपों की सच्चाई
आज के डिजिटल पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिस्पेंसर तापमान के अनुसार वॉल्यूम को स्वचालित रूप से समायोजित कर लेते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों के तहत पेट्रोल की डेंसिटी 15 डिग्री सेल्सियस पर 720 से 775 किलोग्राम प्रति घन मीटर के बीच होनी चाहिए। सुबह का कम तापमान डेंसिटी तो थोड़ी बढ़ा सकता है, लेकिन पंप की मशीनें इसे कंपनसेट कर देती हैं। नतीजा, सुबह या दोपहर भरवाने में कोई फर्क नहीं पड़ता। यह अफवाह पुरानी हो सकती है, लेकिन आधुनिक तकनीक ने इसे बेनकाब कर दिया है।
डेंसिटी जांच क्यों जरूरी?
पेट्रोल पंपों पर हाइड्रोमीटर से डेंसिटी चेक होती है, जो प्रदर्शित होती है। अगर यह 720-775 के दायरे से बाहर है, तो मिलावट का शक होता है, न कि तापमान का असर। डीजल के लिए यह 820-860 के बीच है। कई पंपों पर सुबह भीड़ के कारण जल्दबाजी में गुणवत्ता की अनदेखी हो जाती है, जो इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डेंसिटी मीटर पर नजर रखें और रसीद जरूर लें। कम डेंसिटी वाले ईंधन से माइलेज घटता है और रखरखाव खर्च बढ़ जाता है।
सच्चे फायदे और स्मार्ट टिप्स
सुबह भरवाने का कोई खास लाभ न होने पर भी सावधानी बरतना जरूरी है। बड़े ब्रांड जैसे इंडियन ऑयल, HP या BPCL के पंप चुनें, जहां क्वालिटी कंट्रोल सख्त है। फुल टैंक भरें ताकि बार-बार न जाना पड़े। टायर प्रेशर चेक रखें, एसी कम इस्तेमाल करें और लॉयल्टी ऐप्स जैसे IOCL XtraRewards या Paytm से डिस्काउंट पाएं। ये तरीके मासिक 500-1000 रुपये बचा सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिकायत का अधिकार है, 14566 पर कॉल करें।
जागरूक ड्राइवर बनें
सुबह की होड़ छोड़कर गुणवत्ता पर फोकस करें। अफवाहें फैलाने वाले वीडियो लाखों व्यूज कमाते हैं, लेकिन सच्चाई आपकी जेब बचाएगी। स्मार्ट ड्राइविंग से न सिर्फ पैसे बचेंगे, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। अगली बार पंप पर पहुंचें, तो डेंसिटी चेक करना न भूलें। यह छोटी आदत बड़ी बचत का राज है।
















