
आजकल होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड से लोग अपनी जरूरतों को आसानी से पूरा कर रहे हैं। लेकिन आर्थिक तंगी या अप्रत्याशित परिस्थितियों में EMI समय पर न चुका पाना आम समस्या बन गई है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्जदारों के लिए ‘वरदान’ जैसे तीन प्रमुख नियम बनाए हैं, जो बैंकों और रिकवरी एजेंट्स को मनमानी करने से रोकते हैं। ये नियम न सिर्फ डिफॉल्ट से बचाते हैं, बल्कि क्रेडिट स्कोर को भी सुरक्षित रखते हैं।
RBI के ये नियम 2024-2025 से प्रभावी हो चुके हैं और कर्जदारों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करते हैं। क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (CIBIL) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि कोविड के बाद असुरक्षित लोन जैसे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड खर्च 50% से ज्यादा बढ़ गए हैं। अगर आप 10 लाख का लोन लेकर EMI न चुका पा रहे हैं, तो घबराएं नहीं। RBI गाइडलाइंस के तहत लोन रीस्ट्रक्चरिंग का विकल्प उपलब्ध है, जिसमें मूल राशि को दो हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा तुरंत चुकाना और बाकी को लंबी अवधि में फैला सकते हैं। इससे EMI का बोझ कम होता है और डिफॉल्टर टैग से बचाव होता है।
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पहला नियम: पेनल्टी और ब्याज पर सख्ती
RBI ने 1 अप्रैल 2024 से पेनल्टी चार्ज के नियम बदल दिए। अब बैंक देरी पर पेनल इंटरेस्ट नहीं लगा सकते। पेनल्टी सिर्फ डिफॉल्ट राशि पर ही लगेगी और इसे मूल लोन राशि में जोड़कर ब्याज नहीं वसूला जा सकेगा। उदाहरण के लिए, अगर आपकी EMI 20,000 रुपये है और 10 दिन लेट हो गई, तो बैंक सिर्फ फिक्स्ड पेनल्टी ले सकता है, न कि अतिरिक्त ब्याज। ये नियम कर्जदारों पर अनावश्यक बोझ कम करते हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं। इससे सिबिल स्कोर पर भी कम असर पड़ता है।
दूसरा नियम: रिकवरी एजेंट्स की सख्त सीमाएं
रिकवरी एजेंट्स अब आपको धमका नहीं सकते, बार-बार फोनबॉम्बिंग या घर आकर परेशान नहीं कर सकते। RBI के अनुसार, संपर्क सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक हो सकता है। रविवार, छुट्टियों या रात में कोई कॉल/मैसेज नहीं। अगर उल्लंघन हो, तो RBI की Sachet पोर्टल या बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत करें। लाखों कर्जदारों ने इस नियम का फायदा उठाया है, जिससे मानसिक तनाव कम हुआ। ये नियम Fair Practices Code का हिस्सा हैं, जो बैंक को ग्राहक सम्मान सुनिश्चित करने बाध्य करते हैं।
तीसरा नियम: संपत्ति जब्ती से पहले दोहरी नोटिफिकेशन
संपत्ति (जैसे घर या गाड़ी) जब्त करने से पहले बैंक को 30 दिन का लिखित नोटिस देना जरूरी है, जिसमें पूरी डिटेल्स हों। बिक्री से पहले एक और 30 दिन का पब्लिक नोटिस जारी होता है। अगर बिक्री से अतिरिक्त राशि बचे, तो वो कर्जदार को लौटानी होगी। ये नियम SARFAESI एक्ट के तहत हैं और कर्जदार को बचाव का मौका देते हैं। कोर्ट के बिना कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
लोन रीस्ट्रक्चरिंग का अतिरिक्त फायदा
RBI की गाइडलाइंस से लोन रीस्ट्रक्चरिंग आसान हो गई है। डिफॉल्ट होने पर भी बैंक को मोरेटोरियम (EMI स्थगन) या टेन्योर बढ़ाने का विकल्प देना पड़ता है। इससे सिबिल स्कोर खराब नहीं होता और भविष्य के लोन मिलने का रास्ता खुला रहता है। CIBIL रिपोर्ट के मुताबिक, डिफॉल्टर टैग से 700+ स्कोर वाले 30% लोग प्रभावित होते हैं। तुरंत बैंक से संपर्क करें, दस्तावेज सुरक्षित रखें और लिखित सहमति लें।
कर्जदारों के लिए सलाह
EMI मिस होने पर बैंक शाखा जाएं, समस्या बताएं। UPI ऐप्स या नेट बैंकिंग से ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक करें। अगर धोखाधड़ी हो, तो RBI के नए मुआवजा नियम लागू हैं। जागरूकता से कर्ज बोझ बनने के बजाय सुविधा बनेगी।
















