
हाल ही में राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ‘सार्थक नाम अभियान’ (Sarthak Naam Abhiyan) शुरू करने का ऐलान किया है, इस पहल के तहत उन बच्चों के नाम बदले जाएंगे जो “अजीबोगरीब”, “अपमानजनक” या “अर्थहीन” माने जाते हैं।
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फैसले के पीछे की मुख्य वजहें
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस अभियान की घोषणा करते हुए निम्नलिखित कारण बताए हैं:
- हीन भावना से बचाव: मंत्री के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर माता-पिता नासमझी में बच्चों के नाम ‘कचूमर’, ‘धापू’, या ‘हापुड़ी’ जैसे रख देते हैं। बड़े होने पर इन नामों के कारण बच्चों को सहपाठियों के बीच शर्मिंदगी उठानी पड़ती है और उनमें आत्मविश्वास की कमी या हीन भावना पैदा हो सकती है।
- गरिमापूर्ण पहचान: सरकार का उद्देश्य बच्चों को एक ऐसी पहचान देना है जो सम्मानजनक और अर्थपूर्ण हो।
- अपमानजनक शब्दों को हटाना: आधिकारिक रिकॉर्ड से जाति-आधारित या अपमानजनक शब्दों को हटाकर उनके स्थान पर सम्मानजनक विकल्प अपनाए जाएंगे।
अभियान कैसे काम करेगा?
यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक और संवाद पर आधारित होगी:
- अभिभावकों से परामर्श: शिक्षा विभाग के अधिकारी उन अभिभावकों से बात करेंगे जिनके बच्चों के नाम अर्थहीन हैं और उन्हें नाम बदलने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
- नामों की सूची: विभाग ने 2,000 से 3,000 सार्थक और सकारात्मक नामों की एक सूची तैयार की है। अभिभावक इस सूची में से अपनी पसंद का नया नाम चुन सकते हैं।
- नया मॉडल: यह कदम राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में लागू किए जा रहे ‘नया मॉडल’ और नवाचारों का एक हिस्सा है, जिसमें बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है।
















