
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संसद में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों द्वारा डेटा खत्म होने की समय सीमा (रात 12 बजे) को ‘डेटा लूट’ करार देते हुए ‘डेटा रोलओवर’ की सुविधा लागू करने की मांग की है।
Table of Contents
क्या है राघव चड्ढा का प्रस्ताव?
संसद में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि जब ग्राहक पूरे डेटा प्लान के लिए भुगतान करता है, तो उसका बचा हुआ डेटा बेकार नहीं जाना चाहिए। उन्होंने मुख्य रूप से तीन बड़े बदलावों का सुझाव दिया है:
- डेटा कैरी-फॉरवर्ड: आज का बचा हुआ डेटा एक्सपायर होने के बजाय अगले दिन के कोटा में जुड़ना चाहिए।
- बिल में एडजस्टमेंट: यदि कोई यूजर अपने डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाता है, तो अगले रिचार्ज में उसे बचे हुए डेटा के मूल्य के बराबर डिस्काउंट मिलना चाहिए।
- डेटा ट्रांसफर की आजादी: यूजर को अपना बचा हुआ डेटा दोस्तों या परिवार के साथ शेयर करने की अनुमति मिलनी चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे हम ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करते हैं।
उपभोक्ताओं को कैसे होगा फायदा?
अगर सरकार और TRAI इन मांगों को स्वीकार करते हैं, तो आम जनता को सीधा वित्तीय लाभ होगा:
- पैसों की बर्बादी पर रोक: ग्राहकों को उस हर KB डेटा का लाभ मिलेगा जिसके लिए उन्होंने पैसे चुकाए हैं।
- रीचार्ज की लागत में कमी: डेटा रोलओवर और डिस्काउंट मिलने से बार-बार टॉप-अप कराने की जरूरत खत्म होगी।
- पारदर्शिता: 28 दिनों के ‘छद्म’ महीने (Pseudo-month) के बजाय पारदर्शी बिलिंग सिस्टम की ओर कदम बढ़ेगा।
चड्ढा ने दूरसंचार कंपनियों के 28 दिनों वाले रिचार्ज साइकिल पर भी कड़ा प्रहार किया, जिसके चलते ग्राहकों को साल में 12 के बजाय 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के साथ धोखा बताते हुए मोबाइल रिचार्ज की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव की वकालत की है।
















