
ग्रामीण इलाकों में पुश्तैनी जमीन और मकानों के कागजात को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है, कई परिवारों के पास दादा-परदादा के समय की संपत्ति के ठोस कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की ‘स्वामित्व योजना’ (SVAMITVA Scheme) गेमचेंजर साबित हो रही है, अब सरकार खुद गांवों का सर्वे कर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का असली मालिकाना हक सौंप रही है।
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ड्रोन सर्वे से तैयार हो रहा है डिजिटल रिकॉर्ड
इस योजना के तहत भारतीय सर्वेक्षण विभाग, राज्यों के राजस्व विभाग और पंचायती राज मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं, आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए गांव की ‘आबादी भूमि’ (रिहायशी इलाकों) का सटीक डिजिटल मैप तैयार किया जा रहा है, इससे हर एक घर और जमीन की सीमाएं तय की जा रही हैं, ताकि भविष्य में सीमा विवाद की कोई गुंजाइश न रहे।
क्या है ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ और इसके फायदे?
सर्वे पूरा होने के बाद सरकार संपत्ति के मालिक को एक ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ (मालिकाना प्रमाण पत्र) जारी करती है। यह कार्ड आपके लिए कई बंद दरवाजे खोल देता है:
- यह दस्तावेज इस बात का पुख्ता सबूत है कि जमीन या मकान आपका है।
- अब तक कागजात न होने के कारण गांवों में घर पर लोन लेना मुश्किल था, लेकिन इस कार्ड के जरिए आप आसानी से बैंक से कर्ज ले सकते हैं।
- प्रॉपर्टी कार्ड होने से जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो जाएगी।
- गांव के भीतर होने वाले छोटे-मोटे जमीनी झगड़े अब डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से तुरंत सुलझ सकेंगे।
कैसे चेक करें अपना नाम?
अगर आप भी अपने गांव में इस योजना की स्थिति जानना चाहते हैं, तो सरकार के आधिकारिक स्वामित्व पोर्टल (SVAMITVA) पर जा सकते हैं इसके अलावा, राज्य सरकार के भूलेख (Bhulekh) पोर्टल पर जाकर भी अपने क्षेत्र के डिजिटल मैप और रिकॉर्ड की जानकारी ली जा सकती है विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना न केवल ग्रामीणों को सशक्त बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी। अब किसी भी ग्रामीण को अपनी ही जमीन के हक के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
















