
अगर आप पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) के निवेशक हैं या निवेश की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए ‘5 तारीख’ का गणित समझना बेहद जरूरी है एक छोटी सी देरी आपके सालभर के मुनाफे को कम कर सकती है, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जो निवेशक हर महीने की 5 तारीख तक अपना पैसा जमा कर देते हैं, वे दूसरों के मुकाबले ज्यादा फायदे में रहते हैं।
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क्या है ‘5 तारीख’ का नियम?
PPF में ब्याज की गणना का तरीका अन्य बचत योजनाओं से थोड़ा अलग है नियम के अनुसार, ब्याज उस राशि पर दिया जाता है जो महीने की 5 तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच खाते में न्यूनतम (Minimum Balance) होती है।
- ब्याज का फायदा: अगर आप महीने की 1 से 5 तारीख के बीच पैसा जमा करते हैं, तो उस राशि को उस महीने के ब्याज के लिए गिना जाता है। यानी आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलता है।
- ब्याज का नुकसान: यदि आप 6 तारीख या उसके बाद पैसा जमा करते हैं, तो वह राशि उस महीने के न्यूनतम बैलेंस का हिस्सा नहीं बनती। ऐसे में आपको उस जमा राशि पर अगले महीने से ब्याज मिलना शुरू होता है, जिससे सीधे तौर पर 1 महीने के ब्याज का घाटा होता है।
अप्रैल की ‘डेडलाइन’ क्यों है खास?
नया वित्त वर्ष शुरू होते ही PPF में निवेश करने का यह सबसे सही समय है यदि कोई निवेशक 5 अप्रैल तक साल की अधिकतम सीमा यानी ₹1.5 लाख एकमुश्त जमा कर देता है, तो उसे पूरे 12 महीनों का ब्याज मिलता है।
वर्तमान में 7.1% की ब्याज दर के हिसाब से, समय पर निवेश करने से मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) लंबी अवधि में लाखों का अंतर पैदा कर सकता है।
निवेशकों के लिए काम की बातें
- टैक्स फ्री रिटर्न: PPF ‘EEE’ कैटेगरी में आता है, जहाँ निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों पूरी तरह टैक्स फ्री हैं।
- सालाना सीमा: एक साल में अधिकतम ₹1.5 लाख और न्यूनतम ₹500 का निवेश अनिवार्य है।
- लॉन्ग टर्म बेनेफिट: 15 साल की मैच्योरिटी के बाद भी इसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।
अगर आप अपने निवेश पर एक भी रुपये का नुकसान नहीं चाहते, तो अपनी मंथली इंस्टॉलमेंट या लम्पसम निवेश हमेशा महीने की 5 तारीख से पहले ही करें।
















