पंजाब के खेतों में अब बंजर जमीनें बेकार नहीं पड़ी रहेंगी। केंद्र सरकार की पीएम कुसुम योजना के जरिए किसान इन जमीनों पर सोलर पैनल लगाकर लाखों रुपये सालाना कमा सकते हैं। यह योजना न केवल डीजल पंपों पर खर्च बचाती है, बल्कि किसानों को ऊर्जा उत्पादक भी बना रही है। मार्च 2026 तक चल रही इस स्कीम में 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है।

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योजना की पूरी जानकारी!
पीएम कुसुम, यानी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, 2019 में शुरू हुई। इसका मकसद देशभर में 34,800 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ना है। कुल बजट 34,422 करोड़ रुपये का है, जिसमें केंद्र सरकार का बड़ा हिस्सा शामिल है। कोविड जैसी चुनौतियों के बावजूद योजना को बढ़ाकर 2026 तक चलाने का फैसला लिया गया। अब बजट 2026 में इसका दूसरा चरण शुरू होने की चर्चा है, जिसमें फंडिंग और बढ़ सकती है। इससे किसानों की आय दोगुनी करने का सपना साकार होगा।
तीन प्रमुख हिस्से
योजना तीन मुख्य भागों में बंटी है। पहला हिस्सा बंजर या अनुपजाऊ जमीन पर छोटे-मोटे सोलर प्लांट लगाने का है। यहां 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के प्लांट किसान खुद या समूह में लगा सकते हैं। दूसरा हिस्सा स्टैंडअलोन सोलर वॉटर पंप लगाने का है, जिससे खेतों में बिना बिजली-पानी की चिंता सिंचाई हो सके। तीसरा हिस्सा पुराने ग्रिड से जुड़े पंपों को सोलर से बदलने का है। इनमें व्यक्तिगत पंपों के साथ-साथ बड़े स्तर पर फीडर सोलराइजेशन भी शामिल है। हर हिस्सा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
बंजर जमीन पर कमाई का राज
बंजर भूमि वाले किसानों के लिए यह योजना वरदान है। दो हेक्टेयर तक की जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर या किराए पर देकर प्रति हेक्टेयर 80,000 रुपये सालाना कमाई हो सकती है। डेवलपर प्लांट लगाता है, तो किसान बिना निवेश के आय का मजा लेते हैं। खुद लगाने पर बिजली बेचकर और भी फायदा। डीजल पंप पर होने वाला सालाना 60,000 रुपये का खर्च भी बच जाता है। पंजाब जैसे राज्यों में हजारों किसान पहले ही इससे लाभान्वित हो चुके हैं। यह न केवल आय बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण को भी हरा-भरा रखता है।
सब्सिडी और सरकारी मदद
सब्सिडी की बात करें, तो केंद्र सरकार 30 प्रतिशत तक सीधी सहायता देती है। राज्य सरकारें अतिरिक्त 30 प्रतिशत जोड़ती हैं, जिससे कुल 60 प्रतिशत तक मदद मिल जाती है। कुछ मामलों में यह 90 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। उत्तर-पूर्वी राज्यों को 50 प्रतिशत केंद्र quota मिलता है। फीडर स्तर पर प्रति मेगावाट 1.05 करोड़ रुपये की सहायता है। किसान को सिर्फ बाकी हिस्सा भरना पड़ता है, जो लोन से आसानी से ले सकते हैं।
प्रगति और राज्यवार उपलब्धियां
अभी तक लाखों पंप लग चुके हैं और सैकड़ों मेगावाट प्लांट काम कर रहे हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश आगे हैं। पंजाब में भी 18,000 से ज्यादा सैंक्शन हो चुके हैं। कुल मिलाकर करोड़ों का लक्ष्य पूरा होने की राह पर है। यह प्रगति किसानों के उत्साह को दिखाती है।
आवेदन कैसे करें?
किसी भी किसान, समूह या पंचायत को यह योजना मिल सकती है। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आधार, जमीन के कागजात और बैंक खाता दिखाकर ऑनलाइन आवेदन करें। राज्य कृषि विभाग के पोर्टल भी काम करते हैं। फर्जी साइटों से बचें। प्रक्रिया सरल है, बस समय पर कदम उठाएं।
भविष्य की संभावनाएं
बजट 2026 में नया वर्जन लाने से बैटरी स्टोरेज जैसी तकनीकें जुड़ेंगी। इससे रात में भी सोलर बिजली मिलेगी। पंजाब के सोलर उद्यमी इसे और बढ़ावा दे रहे हैं। किसान भाइयों, बंजर जमीन को कमाई का जरिया बनाएं। यह आपके खेतों का नया युग है।
















