
अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई PM E-DRIVE योजना के भविष्य को लेकर सरकार के ताजा रुख ने खरीदारों के बीच हलचल तेज कर दी है, क्या आने वाले दिनों में ई-स्कूटर सस्ते होंगे या आपकी जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा? आइए समझते हैं पूरी स्थिति।
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वर्तमान में ‘मौज’: सीधे तौर पर मिल रही है सब्सिडी
सरकार की PM E-DRIVE (प्रोत्साहन के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना) योजना के तहत वर्तमान में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदारों को बड़ी राहत मिल रही है।
- सीधी छूट: खरीदारों को ₹2,500 प्रति kWh (अधिकतम ₹5,000 प्रति वाहन) की तत्काल सब्सिडी दी जा रही है।
- e-Voucher सुविधा: सब्सिडी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार आधार-आधारित ई-वाउचर का उपयोग कर रही है, जिससे ग्राहक को शोरूम पर ही डिस्काउंट मिल जाता है।
- बड़ा लक्ष्य: सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक लगभग 24.79 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
31 मार्च 2026 के बाद ‘बोझ’: क्या कीमतें बढ़ेंगी?
चिंता की बात यह है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए यह राहत केवल 31 मार्च 2026 तक ही सीमित है। हालांकि सरकार ने PM E-DRIVE योजना की कुल अवधि को मार्च 2028 तक बढ़ाया है, लेकिन यह विस्तार केवल ई-ट्रक, ई-बस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है।
अगर सरकार इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए सब्सिडी की समयसीमा को आगे नहीं बढ़ाती है, तो:
- कीमतों में उछाल: 1 अप्रैल 2026 से इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमतों में ₹5,000 से ₹10,000 तक की सीधी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
- सब्सिडी खत्म: वर्तमान प्रोत्साहन राशि शून्य हो जाएगी, जिससे मिड-रेंज स्कूटर आम आदमी की पहुंच से दूर हो सकते हैं।
- इनपुट कॉस्ट: कच्चे माल (जैसे एल्युमीनियम और लिथियम-आयन सेल) की बढ़ती लागत पहले से ही कंपनियों पर दबाव बना रही है, जो अंततः ग्राहकों पर ही डाली जाएगी।
सरकार का अगला कदम क्या होगा?
भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने टू-व्हीलर श्रेणी के लिए सब्सिडी को बढ़ाने के वास्ते वित्त मंत्रालय के पास प्रस्ताव भेजा है विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को 2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य की ओर बढ़ना है, तो सरकार को इस सब्सिडी को जारी रखना होगा।
















