
उत्तराखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर बनाने का सपना देख रहे लाभार्थियों के लिए एक बड़ी खबर है, राज्य सरकार ने आवास निर्माण की सुस्त रफ्तार को देखते हुए सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, नए आदेशों के मुताबिक, यदि किसी लाभार्थी ने पहली किस्त मिलने के बाद भी घर का काम शुरू नहीं किया या निर्माण में अनावश्यक देरी की, तो सरकार उनसे आवंटित धनराशि की रिकवरी (वापसी) करेगी।
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जियो-टैगिंग से होगी निगरानी, लापरवाही पड़ेगी भारी
शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब आवास के हर चरण की कड़ी निगरानी की जाएगी, प्रशासन जियो-टैगिंग (Geo-tagging) के जरिए निर्माण कार्य की प्रगति को ट्रैक करेगा अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में लाभार्थी पैसा लेने के बाद भी काम शुरु नहीं करते या उस धन को अन्य कार्यों में खर्च कर देते हैं, अब ऐसी लापरवाही बरतने वालों से ब्याज सहित पैसा वापस लिया जा सकता है।
किस्तों के भुगतान के कड़े नियम
योजना के तहत अगली किस्त तभी जारी की जाएगी जब पिछली किस्त का उपयोग प्रमाण-पत्र और निर्माण की फोटो पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लाभार्थियों को 1.30 लाख रुपये (ग्रामीण) और शहरी क्षेत्रों में 2.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।
PMAY-U 2.0 के लिए भी शर्तें तय
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘पीएम आवास योजना-शहरी 2.0’ का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके पास अगस्त 2024 से पहले की अपनी जमीन मौजूद है, सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवंटित बजट का सही उपयोग हो और पात्र लोगों को समय पर छत मिल सके।
प्रमुख निर्देश
- पहली किस्त मिलने के तुरंत बाद निर्माण शुरू करना अनिवार्य।
- धनराशि का दुरुपयोग करने पर होगी कानूनी कार्रवाई।
- शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता बरकरार।
















