राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए एक बड़ा अलर्ट है। 28 फरवरी 2026 के बाद एक ही गाड़ी से जुड़े अतिरिक्त फास्टैग पूरी तरह ब्लॉक हो जाएंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि टोल प्लाजा पर आपको कैश से दोगुना शुल्क चुकाना पड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस कदम से टोल व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन लाखों ड्राइवर अभी भी अनजान हैं।

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नीति का पूरा खुलासा
यह नियम वाहन मालिकों को बाध्य करता है कि हर गाड़ी का पंजीकरण नंबर केवल एक ही सक्रिय फास्टैग से जुड़ा रहे। पहले लोग एक टैग को कई गाड़ियों पर या एक गाड़ी पर कई टैग चला लेते थे। इससे टोल डिडक्शन में गड़बड़ी आती थी, फर्जीवाड़ा बढ़ता था और प्लाजा पर जाम लगता था। अब सिस्टम खुद ही जांचेगा। सबसे नया और अपडेटेड केवाईसी वाला टैग ही काम करेगा। बाकी सब निष्क्रिय। फ्लीट मालिकों और कैब सर्विस चलाने वालों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
28 फरवरी क्यों है आखिरी मौका?
पिछले दो सालों में कई बार समय सीमा बढ़ाई गई, लेकिन अब कोई छूट नहीं। फरवरी 2026 के अंत तक सभी पुराने फास्टैग का केवाईसी अनिवार्य हो गया है। नए टैग पर तो यह प्रक्रिया पहले से ही सरल हो चुकी है। अगर आपकी गाड़ी पर दो या ज्यादा टैग लिंक हैं, तो तुरंत अतिरिक्त को बंद करवाएं। अन्यथा हाईवे यात्रा महंगी साबित होगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देशभर में करोड़ों टैग प्रभावित हो सकते हैं।
केवाईसी स्टेटस की जांच आसान कदमों में
सबसे पहले अपने बैंक के फास्टैग ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करें। वहां प्रोफाइल सेक्शन में जाकर वाहन नंबर डालें। स्टेटस तुरंत दिखेगा। अगर एनपीसीआई पोर्टल पर जाएं तो रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल भरने से पूरी डिटेल मिल जाएगी। कस्टमर केयर पर कॉल करें या निकटतम बैंक शाखा में आरसी और पहचान पत्र ले जाएं। अपडेट में दो से सात दिन लग सकते हैं। मुख्य दस्तावेजों में आधार, पैन और वाहन आरसी शामिल हैं।
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अतिरिक्त टैग बंद करने का तरीका
जिस टैग में बैलेंस ज्यादा हो, उसे मुख्य रखें। दूसरे टैग के प्रोवाइडर को मैसेज या ऐप से बंदी का अनुरोध भेजें। आरसी की कॉपी संलग्न करें। रिफंड एक से दो हफ्ते में अकाउंट में आ जाएगा। पार्किंग पेमेंट करने वालों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि एक ही टैग से मॉल और एयरपोर्ट पर भुगतान संभव हो सकेगा।
नजरअंदाज करने के जोखिम
ब्लॉक टैग पर कैश पेमेंट अनिवार्य होगा, जो सामान्य शुल्क से दोगुना है। बार बार ऐसा करने पर टैग स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट हो सकता है। वाहन मालिक बदलने पर भी पुराना टैग काम नहीं करेगा। कुल मिलाकर टोल कलेक्शन तेज होगा, प्रदूषण कम होगा और ईंधन की बचत भी। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर परेशानी से बचने के लिए अभी हरकत में आएं।
आगे की राह
यह बदलाव डिजिटल इंडिया की दिशा में मील का पत्थर है। सभी वाहन मालिकों को अपने मोबाइल पर संबंधित ऐप रखना चाहिए। समय रहते अपडेट करें ताकि यात्रा बाधित न हो। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
















