
दशकों से ठंडे बस्ते में पड़े महिला आरक्षण विधेयक को अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में नई पहचान मिल गई है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक “ऐतिहासिक मोड़” करार दिया है। इस कानून के पारित होने के साथ ही भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
Table of Contents
33% आरक्षण: अब सदन में गूंजेगी आधी आबादी की आवाज
इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करना है। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में से करीब 181 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के खाते में जाएंगी। दिल्ली विधानसभा में भी यही व्यवस्था लागू होगी।
कोटे के अंदर कोटा: सामाजिक न्याय का संतुलन
अधिनियम की खास बात यह है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित कुल सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें उन्हीं श्रेणियों की महिलाओं के लिए सुरक्षित रखी गई हैं। इसके अलावा, रोटेशन प्रणाली के जरिए अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिलता रहेगा।
कब से होगा लागू?
हालांकि यह कानून संसद से पास हो चुका है, लेकिन इसे धरातल पर आने में अभी समय लगेगा केंद्र सरकार के अनुसार, आगामी जनगणना (Census) और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा माना जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाएं इस आरक्षण का लाभ उठा सकेंगी।
आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर भी बड़ी तैयारी
राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ सरकार आर्थिक सशक्तिकरण पर भी जोर दे रही है ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ और ‘नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना’ के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ₹2 लाख तक की वित्तीय सहायता और भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है वहीं, ‘मिशन शक्ति’ के तहत संकटग्रस्त महिलाओं के लिए आश्रय और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
प्रधानमंत्री के इस ऐलान ने न केवल संसद की तस्वीर बदलने का रास्ता साफ किया है, बल्कि देश की महिलाओं के लिए सत्ता की दहलीज तक पहुंचने का दशकों पुराना इंतजार भी खत्म कर दिया है।
















