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Nano Urea Subsidy: खाद की किल्लत खत्म! अब नैनो यूरिया पर मिलेगी 50% की अतिरिक्त छूट, किसानों के लिए नई गाइडलाइन जारी।

पारंपरिक यूरिया ने मिट्टी बर्बाद कर दी? गुजरात मॉडल से किसानों को आधी कीमत पर नया जादू! लागत 50% घटी, पैदावार स्थिर पंजाब वाले जागो! सरकारी योजना ने खेती क्रांति ला दी। अभी न चूके ये मौका, खेतों में कमाल देखो!

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देशभर में पारंपरिक खाद की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने किसानों को परेशान कर रखा है। ऐसे में गुजरात सरकार की नैनो यूरिया योजना ने नया रास्ता दिखाया है। इस योजना से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी पर आधी छूट मिल रही है। किसान अब कम लागत में बेहतर खेती कर पा रहे हैं। यह कदम मिट्टी की सेहत सुधारने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा प्रयास है।

Nano Urea Subsidy: खाद की किल्लत खत्म! अब नैनो यूरिया पर मिलेगी 50% की अतिरिक्त छूट, किसानों के लिए नई गाइडलाइन जारी।

योजना की शुरुआत और उद्देश्य

पिछले साल अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर गुजरात में इसकी बड़ी धूमधाम से शुरुआत हुई। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने खुद मंच संभाला और किसानों को पारंपरिक यूरिया के नुकसानों से आगाह किया। उन्होंने बताया कि ठोस खाद मिट्टी को बंजर बनाती है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाती है। नैनो यूरिया तरल रूप में आता है। यह पौधों को सीधे पोषण देता है। एक छोटी बोतल 40 से 50 किलो पारंपरिक खाद के बराबर काम करती है। सरकार का लक्ष्य किसानों को सस्ते और प्रभावी विकल्प देना है। इससे खाद आयात पर निर्भरता भी घटी है।

कैसे मिलेगी छूट और आवेदन प्रक्रिया?

गुजरात के पंजीकृत किसान आसानी से लाभ ले सकते हैं। स्थानीय सहकारी समितियों या कृषि केंद्रों से नैनो यूरिया खरीदें। आधार कार्ड लिंक करवाकर राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करें। प्रति हेक्टेयर 750 रुपये तक की सहायता सीधे खाते में आ जाती है। सालाना 45 लाख बोतलों पर यह लाभ लागू है। कुल बजट 45 करोड़ रुपये का है। पंजाब जैसे राज्यों में भी किसान संगठन इसी मॉडल की मांग कर रहे हैं। डीबीटी पोर्टल से जांच कर आवेदन करें। खरीद के बाद बिल जमा करने पर कुछ ही दिनों में पैसा मिल जाता है।

फसलों के लिए खास फायदे

नैनो यूरिया नाइट्रोजन की 80 प्रतिशत से ज्यादा जरूरत पूरी करता है। इसे पानी में घोलकर स्प्रे करें। मात्र 2 से 4 मिली प्रति लीटर पर्याप्त है। गेहूं, धान, सब्जियों और फलों में जबरदस्त असर पड़ता है। मिट्टी का प्रदूषण रुकता है। पानी की बचत होती है। फसल चक्र तेजी से पूरा होता है। पारंपरिक खाद की तुलना में लागत आधी रह जाती है। किसान बताते हैं कि पैदावार स्थिर रहती है। ऊपरी पोषण से फल बड़े और स्वादिष्ट बनते हैं। लंबे समय में खेत की उर्वरता बनी रहती है।

चुनौतियां और भविष्य की राह

कुछ किसान अभी भी पुरानी खाद पर भरोसा करते हैं। पैदावार में मामूली कमी की आशंका से हिचकिचाहट है। लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सही मात्रा और समय पर इस्तेमाल से कोई नुकसान नहीं। सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। डेमो प्लॉट्स पर ट्रेनिंग दी जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन कार्यक्रम तेज हो गए हैं। आने वाले महीनों में अन्य राज्य भी शामिल हो सकते हैं। 2026-27 का यूरिया बजट बढ़ा है। नैनो को प्राथमिकता मिल रही है।

किसानों के लिए संदेश

पंजाब के खेतों में खाद की मार से जूझ रहे भाइयों, नैनो यूरिया आजमाएं। नजदीकी केंद्र से संपर्क करें। यह न सिर्फ जेब हल्की करेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ खेती सुनिश्चित करेगा। सरकार की यह पहल किसान कल्याण की मिसाल है। टिकाऊ कृषि का युग शुरू हो चुका है।

Nano Urea Subsidy
Author
info@ortpsa.in

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