
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिख रही है पीआईबी (PIB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत हज़ारों महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है, यह योजना न केवल खेती को आधुनिक बना रही है, बल्कि महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के सपने को भी साकार कर रही है।
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क्या है नमो ड्रोन दीदी योजना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन तकनीक से लैस करना है। इसके तहत महिलाओं को खेती में खाद और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनकी आय में भारी वृद्धि होती है।
प्रमुख लाभ और वित्तीय सहायता
- भारी सब्सिडी: सरकार ड्रोन की खरीद पर 80% (अधिकतम ₹8 लाख) तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- सस्ता लोन: शेष राशि के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के माध्यम से मात्र 3% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध है।
- आय का जरिया: एक स्वयं सहायता समूह इस सेवा के जरिए सालाना कम से कम ₹1 लाख की अतिरिक्त आय सुनिश्चित कर सकता है।
- फ्री ट्रेनिंग: चयनित महिलाओं को 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें 5 दिन की अनिवार्य ड्रोन पायलट ट्रेनिंग शामिल है।
कौन हो सकता है पात्र? (Eligibility Criteria)
- स्वयं सहायता समूह (SHG): आवेदक महिला किसी मान्यता प्राप्त SHG की सक्रिय सदस्य होनी चाहिए।
- आयु: महिला की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: कम से कम 10वीं कक्षा पास होना अनिवार्य है।
- स्वास्थ्य: आवेदक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होनी चाहिए।
आवेदन की प्रक्रिया: ऐसे भरें फॉर्म
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन मुख्य रूप से ऑनलाइन और विभागीय माध्यमों से किए जा रहे हैं:
- इच्छुक उम्मीदवार Lakhpati Didi Portal या संबंधित राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।
- आधार कार्ड, SHG पंजीकरण प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होगी।
- अधिक सहायता के लिए अपने जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नमो ड्रोन दीदी योजना से न केवल ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि कृषि क्षेत्र में लागत कम और पैदावार अधिक होने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।














