
देश में बेटियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने और समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच पैदा करने के लिए सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना को रफ्तार दी है, ‘माझी कन्या भाग्यश्री योजना’ के तहत अब बेटियों के जन्म पर सरकार न केवल आर्थिक मदद दे रही है, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य की गारंटी भी ले रही है, इस योजना का मुख्य आकर्षण ₹50,000 की नकद एफडी और ₹1 लाख का दुर्घटना बीमा है।
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क्या है यह योजना और कैसे मिलता है लाभ?
यह योजना मुख्य रूप से बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करने और लिंगानुपात में सुधार के लिए डिजाइन की गई है। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- ₹50,000 की फिक्स्ड डिपॉजिट: यदि माता या पिता बेटी के जन्म के बाद परिवार नियोजन (नसबंदी) अपनाते हैं, तो सरकार बेटी के नाम पर ₹50,000 की राशि बैंक में जमा करती है।
- दो बेटियों के लिए प्रावधान: यदि किसी परिवार में दो बेटियां हैं, तो दोनों के नाम पर ₹25,000-₹25,000 की राशि जमा की जाती है।
- ₹1 लाख का बीमा कवर: आर्थिक सहायता के साथ-साथ, बेटी को ₹1 लाख का दुर्घटना बीमा भी प्रदान किया जाता है, जो किसी भी आपात स्थिति में परिवार को सुरक्षा देता है।
- ब्याज का लाभ: जमा की गई राशि पर मिलने वाला ब्याज समय-समय पर बेटी की शिक्षा के लिए निकाला जा सकता है, जिससे उसकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता)
योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ आसान शर्तें रखी हैं:
- निवास: आवेदक महाराष्ट्र राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आय सीमा: परिवार की वार्षिक आय ₹7.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- दस्तावेज: आवेदन के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और बेटी का जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
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कैसे करें आवेदन?
अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आप अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र, ग्राम पंचायत या महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, आधिकारिक सरकारी पोर्टल myScheme के माध्यम से भी फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता है।
भविष्य की सुरक्षा का बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाओं से न केवल भ्रूण हत्या जैसे अपराधों पर लगाम लगेगी, बल्कि लड़कियां आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी, 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर बेटी को पूरी मैच्योरिटी राशि मिल जाती है, जिसका उपयोग वह अपनी शादी या करियर के लिए कर सकती है।
















