
सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक नई ‘डिजिटल क्रेडिट’ प्लानिंग पर काम कर रहे हैं, जो विशेष रूप से पहली बार लोन लेने वाले युवाओं, ग्रामीण आबादी और छोटे उद्यमियों (MSMEs) के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
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यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI): ‘कर्ज’ का नया UPI
जैसे UPI ने पेमेंट्स की दुनिया बदली, वैसे ही ULI कर्ज लेने की प्रक्रिया को आसान बना रहा है।
- डिजिटल डेटा का उपयोग: बैंक अब केवल सिबिल स्कोर के बजाय आपके बिजली-पानी के बिल, जीएसटी डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन और भूमि रिकॉर्ड के आधार पर आपकी क्रेडिट योग्यता (Creditworthiness) मापेंगे।
- समय की बचत: जहाँ पहले लोन अप्रूवल में हफ्तों लगते थे, अब ULI के जरिए यह काम कुछ ही मिनटों में हो सकेगा।
पहली बार लोन लेने वालों को बड़ी राहत
वित्त मंत्रालय ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे केवल ‘सिबिल हिस्ट्री’ न होने के कारण किसी नए आवेदक का लोन रिजेक्ट नहीं कर सकते।
- RBI के 2025-26 के नए नियमों के अनुसार, बैंकों को सिबिल के अलावा अन्य ‘ड्यू डिलिजेंस’ फैक्टर्स पर ध्यान देने को कहा गया है।
AI-आधारित क्रेडिट स्कोरिंग का दौर
सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स के जरिए वैकल्पिक क्रेडिट प्रोफाइल तैयार करने पर विचार कर रही है।
- यह सिस्टम आपके डिजिटल फुटप्रिंट (जैसे मोबाइल रिचार्ज और ऑनलाइन भुगतान) को ट्रैक कर आपकी भुगतान क्षमता का आकलन करेगा।
- MSMEs के लिए एक नया डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (CAM) पेश किया गया है, जो कागजी कार्रवाई को खत्म कर पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करता है।
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सिबिल नियमों में अन्य बड़े बदलाव (2026)
- साप्ताहिक अपडेट: अप्रैल 2026 से, बैंक आपकी क्रेडिट जानकारी को हर हफ्ते ब्यूरो के साथ साझा करेंगे। इससे ईएमआई (EMI) भुगतान या लोन बंद करने की जानकारी आपके स्कोर में महज 7 दिनों के भीतर दिखने लगेगी।
- कोई पेनल्टी नहीं: 1 जनवरी 2026 से, फ्लोटिंग रेट वाले रिटेल लोन (होम, पर्सनल लोन) पर फोरक्लोजर और प्री-पेमेंट चार्जेस को पूरी तरह हटा दिया गया है।
सरकार की इस प्लानिंग का सीधा फायदा उन लोगों को होगा जो ‘न्यू-टू-क्रेडिट’ श्रेणी में आते हैं और पारंपरिक बैंकिंग नियमों के कारण अब तक औपचारिक कर्ज से वंचित थे।
















