देशभर में करोड़ों परिवार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत हर साल पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज पा रहे हैं। यह योजना गरीबों के लिए वरदान बनी हुई है, खासकर गंभीर बीमारियों के समय। लेकिन कई बार कार्ड होने के बावजूद अस्पताल वाले इलाज से मना कर देते हैं। कारण साफ हैं, योजना में कुछ खास शर्तें हैं जिन्हें जानना हर लाभार्थी के लिए जरूरी है। अस्पताल पहुंचने से पहले इन छह प्रमुख नियमों पर गौर कर लें, ताकि आखिरी वक्त पर निराशा न हो।

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ओपीडी इलाज योजना से बाहर
आयुष्मान कार्ड का लाभ तभी मिलता है जब मरीज को अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती किया जाए। रोजमर्रा की छोटीमोटी परेशानियां जैसे बुखार, सर्दी या मामूली चोट का इलाज बाहर से ही होता है, इसे ओपीडी कहते हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां या प्राथमिक उपचार का पूरा खर्च खुद उठाना पड़ता है। लाखों लोग इसी भ्रम में रहते हैं कि कार्ड दिखाते ही हर तरह का इलाज फ्री हो जाएगा। वास्तव में योजना का फोकस गंभीर और लंबे इलाज पर है।
जांच परीक्षण पर सीधी पाबंदी
केवल ब्लड टेस्ट, एक्सरे या सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए कार्ड काम नहीं करता। भर्ती होने के बाद की जांच ही कवर होती है। अगर डॉक्टर कहें कि पहले बाहर जांच कराओ, तो वह पैसा जेब से निकलना ही है। कई मरीज इसी गलती में फंस जाते हैं और बाद में शिकायत करते हैं। सलाह यही है कि हमेशा योजना से जुड़े अस्पताल में भर्ती होकर ही आगे बढ़ें। इससे जांच और इलाज दोनों का खर्च माफ हो जाता है।
दांत के सामान्य उपचार अपात्र
दांत दर्द हो या कैविटी भरनी हो, रूट कैनाल या सफाई की जरूरत पड़े, ये ज्यादातर इलाज आयुष्मान के दायरे से बाहर हैं। नया दांत लगाना या मसूड़ों की हल्की समस्या का भी फ्री उपचार नहीं। अपवाद सिर्फ गंभीर मामले हैं, जैसे सड़क हादसे में दांत टूटना या कैंसर जैसी बीमारी। सौंदर्य सुधार से जुड़े काम तो कभी ही कवर नहीं होते। ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर इसी कारण परेशान होते हैं, क्योंकि सरकारी दंत चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं।
प्रजनन संबंधी मदद नहीं
बांझपन दूर करने के प्रयास, टेस्ट ट्यूब बेबी या आर्टिफिशियल तरीकों से बच्चा पैदा करने का खर्च योजना वहन नहीं करती। ये महंगे उपचार हैं और इन्हें अलग सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। कई दंपतियों को कार्ड दिखाने पर अस्पताल वाले साफ मना कर देते हैं। जागरूकता अभियान में इस बिंदु को ज्यादा जोर देकर बताया जाना चाहिए ताकि भावनात्मक और आर्थिक नुकसान न हो।
टीकाकरण का खर्च खुद वहन करें
वैक्सीन लगवानी हो, चाहे कोविड की हो या अन्य बचाव वाली दवाइयां, आयुष्मान कार्ड इनके लिए बेकार है। योजना का उद्देश्य बीमारी होने पर इलाज है, न कि रोकथाम। टीकाकरण के लिए अलग सरकारी कार्यक्रम चलते हैं, जिनका लाभ वहां से लें। महामारी के समय भी इसी नियम का पालन हुआ था।
पुरानी बीमारियों पर खास नजर
पहले से चल रही कुछ पुरानी परेशानियां सीधे कवर हो जाती हैं, लेकिन योजना की शर्तें सख्त हैं। हाल ही में आधार से लिंकिंग अनिवार्य होने से कई कार्ड निष्क्रिय हो सकते हैं। फर्जी लाभ रोकने के लिए जांच तेज हो गई है। अगर कार्ड वैलिड न हो, तो पांच लाख का लाभ रुक जाता है।
अंत में यही कहेंगे कि योजना से जुड़े मान्यता प्राप्त अस्पताल ही चुनें। हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल करें या मोबाइल ऐप से स्थिति जांचें। नियम समझकर इलाज कराएं तो यह योजना गरीबों का सच्चा सहारा बनी रहेगी। जागरूक रहें, स्वस्थ रहें।
















