
कुछ साल पहले तक नया सिम कार्ड खरीदना बेहद आसान था। कोई भी दुकान पर जाकर बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के सिम ले लेता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। फर्जी सिम कार्डों से हो रही धोखाधड़ी, साइबर अपराध और आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने टेलीकॉम एक्ट 2023 के तहत सख्त नियम लागू कर दिए हैं। 1 दिसंबर 2026 से देशभर में ये नियम पूरी तरह प्रभावी हो चुके हैं। नियम तोड़ने पर 3 साल की जेल या 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव सिम से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी हैं।
कुछ महीनों पहले तक सिम लेना बच्चों का खेल था। लेकिन अब eKYC और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य है। टेलीकॉम विभाग (DoT) के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों से सिम लेना या बेचना अब अपराध की श्रेणी में आता है। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि मामूली चूक पर ही जेल हो जाएगी, लेकिन हकीकत यह है कि ये सजा मुख्य रूप से धोखाधड़ी के मामलों में लागू होती है। DoT की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, टेलीकॉम एक्ट की धारा 9 के तहत फर्जी सिम जारी करने पर 3 साल कैद या 50 लाख जुर्माना (या दोनों) का प्रावधान है। हालांकि, पहली बार उल्लंघन पर जुर्माना 50,000 रुपये से शुरू होता है।
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सिम डीलरों पर सख्ती
सबसे बड़ा बदलाव सिम डीलर वेरिफिकेशन में है। अब कोई भी दुकानदार बिना DoT रजिस्ट्रेशन के सिम नहीं बेच सकता। रिटेलर्स को पुलिस वेरिफिकेशन और लाइसेंस लेना होगा। टेलीकॉम ऑपरेटर जैसे Jio, Airtel, Vi और BSNL इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। नियम न मानने पर डीलर को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली-NCR में पिछले हफ्ते 5 दुकानों पर छापा पड़ा, जहां बिना KYC सिम बांटे जा रहे थे। DoT ने चेतावनी दी है कि अनरजिस्टर्ड डीलरों के सिम ब्लॉक हो जाएंगे।
एक ID पर सिर्फ 9 सिम
नियमों के मुताबिक, एक व्यक्ति अधिकतम 9 सक्रिय सिम अपने नाम पर रख सकता है। इससे ज्यादा होने पर अलर्ट भेजा जाता है और अतिरिक्त सिम डी-एक्टिवेट हो जाते हैं। नया सिम लेते समय आधार नंबर, OTP और लाइव फेस स्कैन अनिवार्य है। डेमोग्राफिक डेटा कलेक्शन में नाम, पता, जन्मतिथि जैसी जानकारी जमा करनी पड़ती है। व्यावसायिक उद्देश्य के लिए थोक सिम लेने वालों को अलग लाइसेंस चाहिए। सिम डी-एक्टिवेशन का नया नियम कहता है कि निष्क्रिय नंबर 90 दिनों बाद ही किसी और को अलॉट होगा। इससे फर्जी नेटवर्क बनाना मुश्किल हो गया है।
धोखाधड़ी रोकने का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि ये कदम साइबर फ्रॉड, OTP चोरी और बैंकिंग घोटालों पर अंकुश लगाएंगे। 2025 में DoT ने 20 लाख फर्जी सिम ब्लॉक किए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, eKYC से 95% धोखाधड़ी रुक सकती है। लेकिन आम उपभोक्ता को परेशानी हो रही है। ग्रामीण इलाकों में बायोमेट्रिक स्कैन की सुविधा कम है।
सुरक्षित सिम कैसे लें?
- अधिकृत स्टोर या ऑपरेटर ऐप पर जाएं।
- आधार से eKYC पूरा करें: OTP और फेस मैच।
- सिम की कीमत 50-150 रुपये; फ्री ऑफर से सावधान।
- 9 सिम से ज्यादा न रखें।
कानूनी विशेषज्ञ राजेश कुमार कहते हैं, “सही दस्तावेज दें तो कोई जोखिम नहीं। फ्रॉड करने वालों के लिए ही सजा है।” DoT ने हेल्पलाइन 1909 शुरू की है। ये नियम अपराधियों को सबक सिखाने के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
















