मध्य पूर्व में छिड़ी तनावपूर्ण जंग के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी चतुर कूटनीति से सबको प्रभावित कर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के सधी हुई रणनीति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकटपूर्ण रास्ते को भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित बना दिया। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि तिरंगे वाले जहाजों को किसी प्रकार की बाधा नहीं दी जाएगी। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाली सच्ची मिसाल है।

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संकटग्रस्त होर्मुज का महत्व
दुनिया का यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा है। यहां से गुजरने वाले अधिकांश कच्चे तेल की सप्लाई पूरी दुनिया पर असर डालती है। हालिया युद्ध की स्थिति ने इसे खतरनाक बना दिया। कई देशों के जहाजों पर हमले हुए, जिससे नेविगेशन लगभग ठप हो गया। अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े वाहनों को रोक दिया गया, जबकि अन्य राष्ट्रों के टैंकर भी जोखिम में फंस गए। ऐसे में भारत के लिए यह राहत किसी चमत्कार से कम नहीं।
जयशंकर की स्मार्ट डिप्लोमेसी
यह सफलता रातोंरात नहीं मिली। जयशंकर ने ईरानी नेतृत्व के साथ गहन बातचीत की। फोन पर हुई चर्चा से लेकर उच्च स्तरीय बैठकों तक, हर कदम सोच-समझकर उठाया गया। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली में चली गुप्त चर्चाओं ने परिणाम दिया। पुराने आर्थिक संबंधों और तटस्थ रुख को आधार बनाकर भारत ने विश्वास जीता। नतीजा यह हुआ कि भारतीय तेल टैंकर बिना किसी रुकावट के इस रास्ते से पार हो गए। नामचीन जहाजों ने सफलतापूर्वक मिशन पूरा किया।
भारतीय जहाजों पर खास नजर
अब तिरंगे वाले सभी वाहनों को विशेष पास की तरह व्यवहार मिलेगा। हाल ही में दो प्रमुख टैंकरों ने साबित कर दिया कि यह वादा खोखला नहीं। एक अन्य जहाज, जो विदेशी ध्वज लिए हुए था लेकिन भारतीय कमान में, भी सुरक्षित लौटा। यह व्यवस्था केवल भारतीय नावों तक सीमित है, जो हमारी विदेश नीति की बारीकी को उजागर करती है। शिपिंग कंपनियां अब चिंतामुक्त होकर ऑपरेशन चला सकती हैं।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य
यह घटना भारत की संतुलित नीति की ताकत दिखाती है। न तो किसी पक्ष का खुला साथ, न विरोध। चाबहार जैसे प्रोजेक्ट्स ने रिश्तों को मजबूत रखा। तेल कीमतों में उछाल के बावजूद भारत को फायदा हो रहा है। ऊर्जा आयात अब जोखिमरहित। लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो क्या होगा? फिलहाल जयशंकर का यह कदम कूटनीति की नई मिसाल बन चुका। सोशल मीडिया पर लोग इसे मास्टरस्ट्रोक कह रहे हैं। भारत ने सिद्ध किया कि बातचीत से बड़े संकट हल हो सकते हैं।
















