आज हर घर में मोबाइल, लैपटॉप और अन्य उपकरणों के चार्जर सॉकेट में दिन-रात लगे रहते हैं। चार्जिंग पूरी हो जाने के बाद भी प्लग निकालना भूल जाते हैं लोग। यह छोटी लगने वाली आदत वास्तव में बिजली बर्बादी, उपकरण खराबी और यहां तक कि आगजनी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल बिजली बिल बढ़ता है बल्कि घर की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।

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बिजली की चुपचाप बर्बादी
चार्जर को प्लग में छोड़ देने पर वह स्टैंडबाय मोड में भी बिजली खींचता रहता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में फैंटम या वैंपायर एनर्जी कहते हैं। एक चार्जर प्रति घंटे 0.1 से 0.5 वाट तक बिजली ले लेता है। घर में पांच-छह चार्जर लगे हों तो महीने में 10 से 20 यूनिट अतिरिक्त खपत हो जाती है। 8-10 रुपये प्रति यूनिट गिनें तो बिल में 80 से 200 रुपये का बोझ पड़ता है। साल भर में यह रकम 500 से 1000 रुपये तक पहुंच सकती है। ऊपर से पर्यावरण को नुकसान, क्योंकि अतिरिक्त बिजली उत्पादन से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। भारत जैसे देश में कुल बिजली का करीब 10 प्रतिशत इसी तरह बर्बाद होता है।
आग लगने का गंभीर खतरा
सबसे बड़ी चिंता आग का जोखिम है। सस्ते या पुराने चार्जर लंबे समय तक चालू रहने पर अंदरूनी तार गर्म हो जाते हैं। प्लास्टिक का आवरण पिघलने लगता है और ढीले सॉकेट में स्पार्किंग शुरू हो जाती है। नम जगहों जैसे किचन या बाथरूम के पास यह समस्या और विकराल हो जाती है। रात में सोते वक्त अगर ऐसा होता है तो पूरे घर को भारी नुकसान हो सकता है। फायर विशेषज्ञ बताते हैं कि कई छोटी-मोटी आग की घटनाएं इसी लापरवाही से होती हैं। यहां तक कि अच्छी कंपनी के चार्जर भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं, क्योंकि सर्किट ब्रेकर कभी-कभी फेल हो जाता है।
उपकरणों पर बुरा असर
लगातार गर्मी से चार्जर के पुर्जे जल्दी खराब हो जाते हैं। छह से बारह महीने में नया खरीदना पड़ता है। फोन की बैटरी पर सीधा असर कम होता है क्योंकि आधुनिक डिवाइस में ओवरचार्ज सुरक्षा होती है। लेकिन प्लग लगा रहने से डिवाइस न जुड़े होने पर भी गर्मी जमा होती रहती है। लैपटॉप चार्जरों में यह दिक्कत ज्यादा पाई जाती है। नतीजा, बार-बार मरम्मत या बदलाव का खर्च।
सुरक्षा के आसान उपाय
इस खतरे से बचना मुश्किल नहीं। चार्जिंग 80-90 प्रतिशत होने पर प्लग निकाल दें। हमेशा ISI मार्क वाले प्रमाणित चार्जर चुनें और नकली से दूर रहें। सॉकेट को साफ रखें, ढीले पोर्ट न इस्तेमाल करें। स्मार्ट प्लग या टाइमर फिट करें जो खुदबखुद बिजली काट दें। बच्चों की पहुंच से दूर रखें और गीली सतहों पर कभी न लगाएं।
उत्तराखंड में खास सावधानी
पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति आम है। ऐसे में यह आदत बिल के साथ सुरक्षा दोनों को प्रभावित करती है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की सलाह है कि सभी फैंटम लोड वाले उपकरण अनप्लग करें। जागरूकता से न सिर्फ पैसा बचेगा बल्कि परिवार सुरक्षित रहेगा। आज से ही आदत बदलें, वरना छोटी गलती भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
















