
आज की तेज-रफ्तार जिंदगी में असंतुलित खान-पान और तनाव ने शरीर में पोषक तत्वों की कमी को आम बना दिया है। इनमें आयरन की कमी सबसे घातक है, जो हीमोग्लोबिन के निर्माण को प्रभावित कर ऑक्सीजन सप्लाई बाधित करती है। भारत में यह समस्या महामारी का रूप ले चुकी है। एनएफएचएस-5 सर्वे के अनुसार, 67.1% बच्चे और 59.1% किशोरियां एनीमिया से जूझ रही हैं, जबकि 4 में से 3 महिलाओं के आहार में आयरन की मात्रा अपर्याप्त है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि शुरुआती संकेतों को थकान समझकर नजरअंदाज करने से यह गंभीर बीमारी बन जाती है।
आयरन की कमी के पीछे कई कारण हैं। महिलाओं में भारी मासिक धर्म, गर्भावस्था या प्रसव के दौरान रक्त हानि प्रमुख है, जबकि पुरुषों में अल्सर या बवासीर जैसे आंतरिक रक्तस्राव। शाकाहारी आहार, चाय-कॉफी का अधिक सेवन (जो आयरन अवशोषण रोकता है) और अपर्याप्त आहार भी जिम्मेदार हैं। परिणामस्वरूप अंग ऑक्सीजन की भूखे रह जाते हैं। आइए जानें वे 5 प्रमुख लक्षण, जिन्हें कभी अनदेखा न करें।
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1. लगातार थकान और कमजोरी
सबसे आम संकेत है अत्यधिक थकान। पर्याप्त नींद के बावजूद सुबह उठते ही आलस छा जाता है। थोड़े काम में सांस फूलना और दिल की धड़कन तेज होना सामान्य है। कारण? हीमोग्लोबिन कम होने से मांसपेशियां ऑक्सीजन से वंचित रहती हैं।
2. त्वचा और चेहरे का पीला पड़ना
हीमोग्लोबिन ही रक्त को लाल रंग देता है। कमी से त्वचा फीकी, पीली हो जाती है- खासकर आंखों के नीचे, मसूड़ों पर। नाखून चम्मच के आकार के (कोइलोनाइकिया) हो जाते हैं।
3. सिरदर्द, चक्कर और सांस फूलना
मस्तिष्क तक कम ऑक्सीजन पहुंचने से लगातार सिरदर्द, चक्कर और सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में तकलीफ। युवा महिलाओं में यह लक्षण ज्यादा देखा जाता है।
4. हाथ-पैर ठंडे रहना
गर्मी में भी उंगलियां बर्फ-सी ठंडी। खराब ब्लड सर्कुलेशन से झनझनाहट होती है। यह रक्त प्रवाह बाधित होने का स्पष्ट इशारा है।
5. बाल झड़ना और नाखून कमजोर होना
बाल जड़ों तक पोषण न पहुंचने से झड़ते हैं, नाखून भंगुर होकर टूटते हैं। पिका (मिट्टी-बर्फ खाने की लालसा) भी असामान्य संकेत है। ये लक्षण नजरअंदाज करने से एनीमिया बढ़ता है, जो हृदय रोग, थायरॉइड या गर्भावस्था जटिलताएं पैदा कर सकता है। बचाव आसान है। हरी सब्जियां जैसे पालक (6 мг/कप), मेथी, दालें (राजमा, सोया), सूखे मेवे (किशमिश, खजूर) शामिल करें। विटामिन-सी स्रोत (नींबू, संतरा) आयरन अवशोषण बढ़ाते हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर आयरन गोलियां, इंजेक्शन या IV थेरेपी सुझाते हैं।
सरकार की ‘एनीमिया मुक्त भारत’ पहल के तहत 15.4 करोड़ बच्चों को आयरन-फोलिक एसिड दिया जा चुका है। ब्लड टेस्ट (सीबीसी, सीरम फेरिटिन) से पुष्टि करें। विशेषज्ञ सलाह: महिलाएं, बच्चे और शाकाहारी सतर्क रहें। स्वस्थ आहार से हीमोग्लोबिन बनाए रखें, वरना छोटी कमी बड़ी मुसीबत बन जाएगी।














