भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका देते हुए ट्रेन टिकट कैंसिलेशन के नियमों में सख्त बदलाव कर दिया है। अब टिकट रद्द करने पर ज्यादा पैसे कटेंगे, खासकर यात्रा से 24 घंटे पहले चार्ट तैयार होने के नए नियम के कारण। रेल मंत्रालय ने 16 जनवरी 2026 से ‘रेल यात्री टिकट रद्दीकरण एवं किराया प्रतिपूर्ति संशोधन नियम 2026’ लागू किया है, जो प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस पर विशेष रूप से असर डालेगा।
पहले चार्ट यात्रा से महज 4 घंटे पहले बनता था, लेकिन अब 24 घंटे पूर्व ही अंतिम सूची तय हो जाएगी। इससे कन्फर्म टिकट धारकों को रिफंड की गुंजाइश बहुत कम रह जाएगी।

Table of Contents
नए नियम क्यों लाए गए?
रेलवे का दावा है कि यह बदलाव ओवरबुकिंग रोकने और ट्रेनों में अनावश्यक भीड़ कम करने के लिए है। करोड़ों यात्री जो रोजाना आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट से टिकट बुक करते हैं, वे अब अधिक सतर्क रहने को मजबूर होंगे। चार्ट बनने के बाद कन्फर्म टिकट कैंसिल करने पर या तो कोई रिफंड नहीं मिलेगा या बहुत मामूली राशि लौटेगी।
आरएसी और वेटिंग लिस्ट टिकटों की स्थिति तो और भी खराब है, ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक ही इन्हें रद्द किया जा सकेगा। उसके बाद एक मिनट की देरी भी पूरा किराया जब्त करवा देगी। यात्री संगठनों ने इसे ‘यात्री विरोधी’ करार देते हुए विरोध जताया है, लेकिन रेलवे इसे अपरिहार्य बता रहा है।
कैंसिलेशन शुल्क कैसे तय होंगे?
अब समय के स्लैब के आधार पर शुल्क बढ़ा दिए गए हैं। अगर ट्रेन प्रस्थान से 48 से 12 घंटे पहले कैंसिल करते हैं, तो कन्फर्म टिकट पर 25 प्रतिशत किराया कटेगा, प्लस क्लर्क चार्ज। 12 से 4 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर आधा यानी 50 प्रतिशत किराया जाएगा। लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब 24 घंटे पूर्व चार्ट बन जाता है। उसके बाद कन्फर्म टिकट पर रिफंड शून्य या न्यूनतम हो जाता है।
तत्काल टिकटों पर तो पहले से ही सख्ती थी, कन्फर्म होने पर कोई रिफंड नहीं। एसी क्लास में क्लर्क चार्ज 240 रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि स्लीपर में यह कम है। वेटिंग टिकट धारकों को चार्ट तैयार होने से पहले ही फैसला लेना होगा, वरना पूरा नुकसान उनका।
कब मिलेगी पूरी राहत?
कुछ खास स्थितियों में रेलवे अभी भी उदार है। अगर ट्रेन बोर्डिंग स्टेशन पर 3 घंटे से ज्यादा लेट पहुंचे, तो सभी यात्रियों को फुल रिफंड का हक है। टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रसीद) भरकर 90 दिनों के अंदर राशि वापस ले सकते हैं। इसी तरह, प्लेटफॉर्म अचानक बदलने या रेलवे की ओर से कोई गलती होने पर पूरा पैसा 3 से 21 दिनों में लौटाया जाता है। एक नई सुविधा के तहत यात्रा की तारीख बदलना भी संभव है, बिना कैंसिलेशन फीस के। लेकिन इन्हें दावा करने के लिए स्टेशन पर जाकर फॉर्म भरना पड़ता है।
यात्रियों के लिए व्यावहारिक सलाह
इस बदलाव से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि टिकट 48 घंटे पहले कैंसिल करें, ताकि अधिकतम रिफंड मिले। आईआरसीटीसी ऐप पर नजर रखें चार्ट तैयार होने की सूचना तुरंत आ जाती है। वेटिंग टिकट वाले लोग वैकल्पिक ट्रेनें ढूंढ लें या यात्रा रद्द करने का फैसला जल्दी लें। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों में तो यह नियम और सख्ती से लागू होगा। रेलवे प्रवक्ता ने कहा, ‘ये बदलाव यात्री सुविधा और ट्रेन संचालन की दक्षता बढ़ाने के लिए हैं।’ फिर भी, हर टिकट बुकिंग से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर नियम जरूर जांचें।
भविष्य में क्या उम्मीद?
रेलवे ने 2026 में कई नई ट्रेनें शुरू की हैं, लेकिन ये नियम यात्रियों की जेब पर भारी पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सालाना अरबों रुपये के रिफंड क्लेम कम हो जाएंगे, जो रेलवे की आय बढ़ाएंगे। लेकिन यात्री अगर जागरूक रहे, तो नुकसान कम किया जा सकता है। हमेशा अपडेट रहें और जल्दबाजी में टिकट न बुक करें। यह नया दौर यात्रियों के लिए सतर्कता का दौर है।
















