
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) अब $690 बिलियन (लगभग ₹57.5 लाख करोड़) के ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंच गया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताजा रिपोर्ट ने इस पर मुहर लगाते हुए बताया है कि आखिर क्यों भारत आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश केंद्र बनकर उभरा है।
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डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती और ‘इकोनॉमिक शील्ड’
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं, $690 बिलियन का यह विशाल भंडार किसी भी बाहरी आर्थिक झटके के खिलाफ एक मजबूत ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम कर रहा है अब दुनिया को यह समझ आ गया है कि डॉलर के उतार-चढ़ाव का भारतीय बाजार पर असर सीमित रहेगा।
10-12 महीने का सुरक्षित ‘आयात कवर’
भारत के पास अब इतना विदेशी पैसा जमा है कि वह बिना किसी अतिरिक्त कमाई के भी 10 से 12 महीनों तक अपना आयात (Import) जारी रख सकता है। दुनिया के कई विकसित देशों के पास भी इतना लंबा बैकअप मौजूद नहीं है, जो भारत की आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।
स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में भारी इजाफा
सिर्फ डॉलर ही नहीं, आरबीआई (RBI) ने अपने खजाने में सोने की मात्रा भी काफी बढ़ा दी है रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का स्वर्ण भंडार अब $110 बिलियन के पार पहुंच चुका है। संकट के समय सोना सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है, और भारत की यह रणनीति उसे अन्य देशों से अलग खड़ा करती है।
विदेशी निवेशकों का बढ़ता भरोसा
SBI का कहना है कि इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार होने के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत को एक ‘सेफ हेवन’ मान रहे हैं। जब दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली का दौर चलता है, तब भी भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रखने में सक्षम हैं।
रुपये की मजबूती का आधार
RBI इस विशाल भंडार का उपयोग रुपये की वैल्यू को स्थिर रखने के लिए करता है, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर महंगा होता है, तो आरबीआई अपने भंडार से डॉलर निकालकर बाजार में सप्लाई बढ़ा देता है, जिससे रुपया अचानक नहीं गिरता यही कारण है कि अन्य मुद्राओं की तुलना में भारतीय रुपया अधिक स्थिर रहा है।
SBI की यह रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि भारत अब केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल इकोनॉमिक पावरहाउस’ बन चुका है, $690 बिलियन का यह आंकड़ा भारत को वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनावों से सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है।
















