
देशभर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ही उपभोक्ताओं के बीच बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें आम हो गई हैं अगर आपको भी लगता है कि आपका स्मार्ट मीटर तेज चल रहा है और बिल जरूरत से ज्यादा आ रहा है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं है, बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं को अपनी संतुष्टि के लिए ‘चेक मीटर’ (Check Meter) लगवाने की सुविधा दी है।
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क्या है ‘चेक मीटर’ और कैसे करता है काम?
चेक मीटर एक प्रकार का पैरेलल (Parallel) मीटर होता है, जिसे आपके मौजूदा स्मार्ट मीटर के साथ ही लगाया जाता है। कुछ दिनों तक दोनों मीटरों की रीडिंग की तुलना की जाती है। यदि मुख्य स्मार्ट मीटर की रीडिंग चेक मीटर से अधिक पाई जाती है, तो उसे ‘डिफेक्टिव’ (खराब) मान लिया जाता है।
ऐसे करें आवेदन: स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- सबसे पहले बिजली विभाग के टोल-फ्री नंबर 1912 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। आप संबंधित डिस्कॉम (जैसे UPPCL, PVVNL आदि) के मोबाइल ऐप या आधिकारिक वेबसाइट पर भी लॉगिन कर सकते हैं।
- अपने नजदीकी बिजली उपकेंद्र (Substation) पर जाकर चेक मीटर लगवाने के लिए एक लिखित प्रार्थना पत्र दें। इसके लिए विभाग द्वारा निर्धारित एक मामूली ‘टेस्टिंग फीस’ जमा करनी होगी।
- आवेदन के साथ अपना आधार कार्ड, पिछले बिजली बिल की कॉपी और जमा की गई फीस की रसीद साथ रखें।
वसूला गया अतिरिक्त पैसा कैसे होगा वापस?
जांच में अगर स्मार्ट मीटर की तकनीकी खराबी सिद्ध हो जाती है, तो उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान से बचाया जाता है। नियमों के मुताबिक:
- बिल एडजस्टमेंट: विभाग द्वारा मीटर गड़बड़ी की अवधि के दौरान वसूले गए अतिरिक्त पैसे को आपके आगामी बिजली बिलों (Future Bills) में घटा दिया जाता है।
- प्रीपेड यूजर्स: यदि आप प्रीपेड मीटर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो रिफंड की राशि आपके वॉलेट बैलेंस में क्रेडिट कर दी जाती है।
सावधानी: पहले खुद करें यह जांच
चेक मीटर के लिए आवेदन करने से पहले घर का मेन स्विच (MCB) बंद करके देखें, यदि MCB बंद होने के बाद भी मीटर की लाइट ब्लिंक कर रही है या रीडिंग बढ़ रही है, तो यह स्पष्ट रूप से मीटर की गड़बड़ी का संकेत है।
















