सोने के बाजार में जारी अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने आयातकों को बड़ी राहत दी है। 14 मार्च की घोषणा के अनुसार, सोने का आधारभूत आयात मूल्य प्रति 10 ग्राम 12 डॉलर घटाकर 1652 डॉलर कर दिया गया है। पहले यह 1664 डॉलर था। यह बदलाव वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव को देखते हुए लिया गया, जो घरेलू व्यापार को मजबूत बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

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आयात मूल्य क्यों जरूरी?
यह मूल्य सोने के आयात पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी और करों की गणना का आधार बनता है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड समय-समय पर इसे वैश्विक बाजार के औसत भावों से जोड़कर अपडेट करता है। कमी से आयात लागत घटती है, जिससे ज्वैलर्स और व्यापारियों का खर्च कम होता है। इसका लक्ष्य घरेलू कीमतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
व्यापारियों और खरीदारों को लाभ
ज्वैलर्स संगठनों का मानना है कि इससे खुदरा भावों में मामूली कमी आएगी। दिल्ली और मुंबई जैसे बाजारों में सोना पहले से महंगा चल रहा था। अब उपभोक्ता कम दाम पर खरीद सकेंगे, खासकर त्योहारों के मौसम में। छोटे व्यापारियों को स्टॉक भरने में आसानी होगी, जबकि बड़े आयातक कर बोझ से मुक्त होंगे। कुल मिलाकर, बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है।
बाजार भावों पर संभावित प्रभाव
नई दरें लागू होने से प्रमुख शहरों में सोने के दाम 200 से 300 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर सकते हैं। चांदी के भाव भी प्रभावित होंगे। हालांकि, डॉलर की मजबूती या वैश्विक घटनाएं इसमें बाधा डाल सकती हैं। निवेशक अब सतर्कता से सोने ईटीएफ या भौतिक सोने पर नजर रखें। यह बदलाव बाजार को स्थिरता प्रदान करेगा।
















