
भारत में आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार और महापंजीयक कार्यालय ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है यदि आप जनगणना के दौरान पूछे गए सवालों के गलत जवाब देते हैं या तथ्यों को छुपाते हैं, तो आपको भारी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, इतना ही नहीं, जनगणना प्रक्रिया के तहत घर पर लगाए गए सरकारी नंबर या नोटिस के साथ छेड़छाड़ करना आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है।
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नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी
जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना के पहले चरण में पूछे जाने वाले सभी 33 प्रश्नों के सही और सटीक उत्तर देना प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य है।
- गलत जानकारी पर जुर्माना: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत डेटा देता है, तो उस पर 1,000 रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
- जेल की सजा: नियमों के गंभीर उल्लंघन या जनगणना कार्य में बाधा डालने पर दोषी को 3 साल तक की कैद या जुर्माना, अथवा दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।
सरकारी नोटिस हटाना अब अपराध
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ‘हाउसलिस्टिंग’ चरण के दौरान घरों पर जो नंबर या सरकारी नोटिस चिपकाए जाएंगे, उन्हें हटाना, मिटाना या नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध माना जाएगा ऐसा करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी साथ ही, जनगणना अधिकारियों को उनके कर्तव्य पालन से रोकना भी दंडात्मक अपराध की श्रेणी में आएगा।
अधिकारियों पर भी रहेगी पैनी नजर
सख्त नियम केवल जनता के लिए ही नहीं, बल्कि जनगणना ड्यूटी में तैनात अधिकारियों के लिए भी हैं यदि कोई अधिकारी डेटा की गोपनीयता भंग करता है, जानबूझकर गलत आंकड़े दर्ज करता है या अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतता है, तो उसे भी 3 साल की जेल की सजा का सामना करना होगा।
2026 से शुरू होगा अभियान
बता दें कि जनगणना का पहला चरण (हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा इसके बाद मुख्य जनगणना (जनसंख्या गणना) फरवरी 2027 में संपन्न होगी खास बात यह है कि इस बार नागरिकों को ‘डिजिटल जनगणना’ और ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया गया है।
नागरिक किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और राष्ट्र निर्माण के इस महत्वपूर्ण कार्य में सही जानकारी देकर सहयोग करें।
















