
केंद्र सरकार सेवानिवृत्त सरकारी और सैन्य अधिकारियों के लिए नियमों को बेहद सख्त करने की तैयारी में है, प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, अब उच्च पदों से रिटायर हुए अधिकारी अपनी सर्विस से जुड़े अनुभवों या संवेदनशील घटनाक्रमों पर 20 साल के ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ से पहले किताब नहीं लिख पाएंगे।
यह भी देखें: योगी सरकार का बड़ा ऐलान! अब इन महिलाओं को नहीं देना होगा बस का किराया, बजट में मिली बड़ी सौगात
Table of Contents
पेंशन पर भी मंडराएगा खतरा
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नियमों में न केवल प्रकाशन पर रोक की बात है, बल्कि कड़े दंड का प्रावधान भी शामिल है, यदि कोई अधिकारी इस नियम का उल्लंघन करता है, तो सरकार उसकी पेंशन रोकने या उसे स्थायी रूप से रद्द करने का बड़ा कदम उठा सकती है।
क्यों पड़ी इस सख्त नियम की जरूरत?
दरअसल, हाल के वर्षों में कई पूर्व सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लिखी गई किताबों ने विवाद खड़े किए हैं, ताज़ा मामला पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर उठा था, जिसे लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया सरकार का मानना है कि रिटायरमेंट के तुरंत बाद अनुभवों को साझा करने से देश की सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर आंच आ सकती है।
प्रस्तावित नियम की मुख्य विशेषताएं
- 20 साल का प्रतिबंध: सेवानिवृत्ति के दो दशक बाद ही संस्मरण या सर्विस से जुड़ी जानकारी साझा की जा सकेगी।
- सैन्य अधिकारियों पर शिकंजा: यह नियम केवल सिविल सर्वेंट्स ही नहीं, बल्कि सैन्य अधिकारियों पर भी समान रुप से लागू होगा।
- मंजूरी प्रक्रिया: वर्तमान में रक्षा मंत्रालय और कार्मिक विभाग पांडुलिपियों (Manuscripts) की समीक्षा के लिए एक नया ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) तैयार कर रहा है।
- सुरक्षा सर्वोपरि: खुफिया एजेंसियों (जैसे RAW, IB) के लिए 2021 में आए नियम अब और अधिक व्यापक होकर पूरे प्रशासनिक ढांचे पर लागू किए जा सकते हैं।
यह भी देखें: Ration Card Rules: अब इन्हें माना जाएगा घर का मुखिया! इन परिवारों का कट जाएगा नाम, देखें नया नियम
स्वतंत्रता या सुरक्षा: छिड़ सकती है बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से एक नई बहस छिड़ सकती है, जहाँ सरकार इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला देकर उचित ठहरा रही है, वहीं पूर्व अधिकारियों का एक वर्ग इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ और ऐतिहासिक तथ्यों को दर्ज करने के रास्ते में रुकावट मान रहा है, हालांकि, आदेश की औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है, लेकिन इस प्रस्ताव ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
















