आजकल हर व्यक्ति के पास औसतन तीन से चार बैंक खाते होते हैं। नौकरी बदलने या नया खाता खोलने के बाद पुराने खाते भूल जाते हैं। लेकिन ये निष्क्रिय खाते चुपचाप आपकी जेब काट रहे होते हैं। न्यूनतम राशि न रखने पर मासिक जुर्माना लगता है। लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर खाता सुस्त पड़ जाता है। इससे फ्रॉड का खतरा भी बढ़ जाता है। लाखों लोग इस जाल में फंस चुके हैं। समय रहते पुराने खाते बंद करना ही समझदारी है।

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निष्क्रिय खाते पर लगेगा जुरमाना
जब खाते में साल भर कोई लेन देन न हो तो वह निष्क्रिय हो जाता है। इससे पहले हर महीने न्यूनतम बैलेंस की कमी पर 100 से 500 रुपये तक कटौती होती रहती है। मान लीजिए खाते में शून्य बैलेंस है। नेगेटिव बैलेंस पर अतिरिक्त ब्याज भी लग सकता है। साल भर में यह राशि हजारों रुपये तक पहुंच जाती है। कई बार खाताधारक को भनक तक नहीं लगती। बैंक चुपचाप कटौती करता रहता है। नतीजा यह होता है कि छोटा सा नुकसान बड़ा रूप ले लेता है।
क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर
पुराने खाते से जुड़े लोन की EMI या बीमा प्रीमियम समय पर न चुकने से क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है। नया लोन लेना मुश्किल हो जाता है। सैलरी खाता नौकरी बदलने के बाद निष्क्रिय रहता है। बैंक इसे अपने तरीके से बंद करने की प्रक्रिया चलाता है। लेकिन तब तक नुकसान हो चुका होता है। खाते से लिंक्ड क्रेडिट कार्ड या ओवरड्राफ्ट की समस्या भी खड़ी हो सकती है। इसलिए सभी लिंक्ड सेवाओं की जांच जरूरी है।
फ्रॉड का सबसे बड़ा डर
हैकर्स पुराने खातों को आसानी से निशाना बनाते हैं। पुराना फोन नंबर या ईमेल होने से अलर्ट बंद हो जाते हैं। अनजाने में कोई धोखाधड़ी हो जाए तो पता चलना देर हो जाता है। खाता खाली होने का खतरा रहता है। साइबर अपराधी ऐसी कमजोर कड़ियों का फायदा उठाते हैं। जागरूकता के अभाव में लोग ठगे जाते रहते हैं। समय पर कार्रवाई न करने से पूरा पैसा डूब सकता है।
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नियमों की सख्ती और जागरूकता
रिजर्व बैंक ने निष्क्रिय खातों पर कड़े नियम बनाए हैं। दस साल तक कोई गतिविधि न होने पर बैलेंस विशेष कोष में चला जाता है। इससे पहले खाता सक्रिय करने में कागजी कार्रवाई और समय लगता है। बैंक ग्राहकों को पहले नोटिस देते हैं। लेकिन कई बार यह प्रक्रिया धीमी रहती है। देशभर में करोड़ों ऐसे खाते पड़े हैं। वित्तीय साक्षरता अभियान चलाने की जरूरत है। हर व्यक्ति को अपने खातों पर नजर रखनी चाहिए।
आसान तरीका खाता बंद करने का
सबसे पहले पासबुक या ऐप से बैलेंस जांचें। सभी डेबिट कार्ड, यूपीआई और ईएमआई लिंक हटाएं। बैंक शाखा में जाकर बंदी फॉर्म भरें। आधार और पैन की कॉपी दें। कार्ड कैंसल करवाएं। अंतिम स्टेटमेंट ले लें। कुछ बैंक न्यूनतम शुल्क ले सकते हैं। इसलिए बैलेंस जीरो न रखें। कई बैंकों में ऑनलाइन बंदी की सुविधा भी है। लिखित पुष्टि जरूर लें। केवल पैसा निकालना काफी नहीं। पूरी प्रक्रिया पूरी करें।
अपनी सुरक्षा खुद करें
डिजिटल बैंकिंग के जमाने में जिम्मेदारी आपकी है। हर छह महीने में सभी खाते जांचें। एसएमएस अलर्ट चालू रखें। अनावश्यक खाते तुरंत बंद करें। फ्रॉड होने पर बैंक और पुलिस से तुरंत संपर्क करें। एक छोटी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत बनाएं। जागरूक बनें और दूसरों को भी बताएं। सुरक्षित बैंकिंग ही सच्ची आजादी है।
















