
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 2026 में पीएफ खाते से आंशिक और पूर्ण निकासी के नियमों में व्यापक बदलाव लागू किए हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य निकासी प्रक्रिया को डिजिटल, तेज और पारदर्शी बनाना है, ताकि करोड़ों सदस्य अपनी बचत को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकें। ईपीएफओ 3.0 के तहत पुराने 13 जटिल नियमों को अब तीन मुख्य श्रेणियों – आवश्यक जरूरतें, आवास संबंधी और विशेष परिस्थितियां- में समेट दिया गया है। इससे क्लेम सेटलमेंट तेज होगा, लेकिन कुछ मामलों में प्रतीक्षा अवधि बढ़ाई गई है।
ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) ने इन बदलावों को मंजूरी दी है, जो अप्रैल 2026 से पूर्ण रूपेण लागू हो जाएंगे। प्रमुख आकर्षण है यूनीफाइड पोर्टल पर आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से बिना नियोक्ता हस्तक्षेप के ऑनलाइन निकासी। साथ ही, एटीएम कार्ड और यूपीआई के जरिए तत्काल निकासी की सुविधा शुरू हो रही है। हालांकि, सभी खातों में न्यूनतम 25% राशि रखना अनिवार्य रहेगा, ताकि रिटायरमेंट सेविंग्स सुरक्षित रहे।
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नौकरी छोड़ने पर निकासी में बदलाव
पहले बेरोजगारी के एक महीने बाद 75% और दो महीने बाद शेष 25% पीएफ निकाल सकते थे। नए नियमों के तहत नौकरी छोड़ने पर 75% राशि तुरंत निकासी योग्य है, लेकिन बाकी 25% के लिए 12 महीने की लगातार बेरोजगारी जरूरी होगी। इससे सदस्यों को तात्कालीन जरूरतों के लिए राहत मिलेगी, लेकिन लंबी बेरोजगारी पर ही पूर्ण निकासी संभव होगी। यह बदलाव ईपीएफओ 3.0 का हिस्सा है, जहां 95% क्लेम ऑटो-अप्रूव होंगे।
पेंशन निकासी की प्रतीक्षा अवधि बढ़ी
नौकरी छूटने के बाद पहले दो महीने की बेरोजगारी पर पेंशन निकासी की अनुमति थी। अब यह अवधि 36 महीने कर दी गई है। इसका मतलब, सदस्य लंबे समय तक बेरोजगार रहने पर ही पेंशन फंड एक्सेस कर सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पेंशन योग्यता बनाए रखने के लिए है, खासकर 10 वर्ष से कम सेवा वाले सदस्यों के लिए।
मेडिकल इलाज के लिए सरलीकरण
मेडिकल के लिए पहले 6 महीने का बेसिक वेतन+डीए या सदस्य योगदान (जो कम हो) निकाल सकते थे। नई व्यवस्था में 12 महीने की न्यूनतम सेवा जरूरी है, लेकिन बार-बार निकासी की छूट बरकरार है। महामारी जैसी स्थिति में 3 महीने का वेतन+डीए या 75% फंड (कम वाला) निकासी संभव रहेगी, नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं।
शिक्षा-शादी पर उदारता
शिक्षा के लिए निकासी अब 10 बार तक, शादी के लिए 5 बार तक संभव है (पहले कुल 3-5 बार)। 7 वर्ष सेवा के बाद 50% योगदान निकाल सकते हैं। यह परिवारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
घर खरीद-बनाने के नियम
पहले 24-36 महीने सेवा पर 90% योगदान+ब्याज निकाल सकते थे। अब सभी आंशिक निकासी के लिए 12 महीने की सेवा पर्याप्त है। खरीद लागत या फंड सीमा लागू रहेगी।
कंपनी बंद होने पर सीमा
कंपनी बंद होने पर पहले 100% निकासी थी। अब केवल 75% निकाल सकेंगे, 25% न्यूनतम रखना जरूरी। इससे सेविंग्स सुरक्षित रहेंगी।
प्राकृतिक आपदा में राहत
₹5,000 या 50% योगदान (कम वाला) निकासी पर 12 महीने सेवा शर्त जोड़ी गई। आपदा प्रभावितों को तत्काल क्लेम ट्रैकिंग मिलेगी।
नई सुविधाएं: यूपीआई और एटीएम
अप्रैल 2026 से यूपीआई/एटीएम से निकासी शुरू। ऑटो-सेटलमेंट ₹5 लाख तक, ब्याज दर 8.25% बरकरार। UMANG ऐप या epfindia.gov.in पर UAN लॉगिन कर फॉर्म 19/31/10C भरें। KYC अपडेट जरूरी।
तुलनात्मक तालिका
| पुराने नियम | नए नियम | प्रभाव |
|---|---|---|
| 13 श्रेणियां | 3 श्रेणियां | सरलता |
| 2 माह पूर्ण निकासी | 12 माह 25% | सुरक्षा |
| मैनुअल क्लेम | ऑटो 95% | तेजी |
| 3-5 बार शिक्षा/शादी | 10/5 बार | उदार |
ये बदलाव 32 बैंकों से सीधे योगदान और 3 दिवस सेटलमेंट सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, जोखिम जैसे फंड एग्जॉस्टशन से बचाव जरूरी। ईपीएफओ सदस्य तुरंत KYC चेक करें।
















