सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही खबरों ने असंगठित श्रमिकों में उत्साह भर दिया है। दावा किया जा रहा है कि ई-श्रम कार्ड धारकों को मुफ्त साइकिल और सिलाई मशीन मिलेगी। कई वीडियो और पोस्ट में 2026 की नई लाभार्थी लिस्ट का हवाला देकर लोगों से नाम चेक करने को कहा जा रहा है। लेकिन गहराई से जांच करने पर पता चलता है कि ये दावे भ्रामक हैं। वास्तविकता यह है कि ई-श्रम कार्ड श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच प्रदान करता है, न कि कोई मुफ्त सामान।

Table of Contents
योजना का वास्तविक स्वरूप
ई-श्रम योजना श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की महत्वाकांक्षी पहल है, जो 2021 से असंगठित क्षेत्र के करीब 30 करोड़ मजदूरों को जोड़ चुकी है। दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, निर्माण कार्यकर्ता, घरेलू सहायक और छोटे कारीगर इसकी छतरी में आते हैं। कार्ड मिलने से श्रमिकों का केंद्रीकृत डेटाबेस बनता है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे खाते में पहुंचता है। दुर्घटना में दो लाख रुपये का बीमा, मृत्यु पर परिवार को सहायता और महंगे इलाज में मदद इसके प्रमुख लाभ हैं। भविष्य में 60 साल की उम्र के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। कुछ राज्यों में मासिक एक हजार रुपये की सहायता की चर्चा है, लेकिन यह सभी पर लागू नहीं।
सिलाई मशीन-साइकिल का सच
वायरल दावों में सिलाई मशीन को पीएम विश्वकर्मा योजना से जोड़ा जा रहा है। यह अलग योजना पारंपरिक कारीगरों जैसे दर्जी, बढ़ई और लोहार के लिए है। इसमें 15 हजार रुपये का ई-वाउचर मिलता है, जिससे उपकरण खरीदे जा सकते हैं। साथ ही प्रशिक्षण भत्ता और कम ब्याज पर लोन की सुविधा है। ई-श्रम कार्ड धारक इससे जुड़ सकते हैं, लेकिन यह सीधा लाभ नहीं। साइकिल का कोई स्पष्ट प्रावधान किसी योजना में नहीं दिखता। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऐसे दावे अक्सर धोखाधड़ी का जरिया बनते हैं, जहां पैसे ऐंठे जाते हैं। असली लाभ बीमा और वित्तीय सुरक्षा तक सीमित हैं।
नई लिस्ट और नाम जांच का तरीका
जनवरी 2026 में जारी बताई जा रही लाभार्थी लिस्ट में आधार और बैंक सत्यापन वाले श्रमिक शामिल हैं। लाखों को मासिक सहायता या अन्य लाभ मिल सकते हैं। नाम चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। आधार नंबर या मोबाइल से लॉगिन करें, ओटीपी सत्यापित करें और स्टेटस देखें। हेल्पलाइन नंबर 14434 पर कॉल कर तुरंत जानकारी लें। पात्रता के लिए 16 से 59 साल की उम्र, भारतीय नागरिक होना और असंगठित क्षेत्र में काम जरूरी है। रजिस्ट्रेशन में आधार, बैंक विवरण और मोबाइल अनिवार्य हैं। अभी तक करोड़ों ने ऑनलाइन या कॉमन सर्विस सेंटर से कार्ड बनवाया है।
श्रमिकों के लिए सलाह
पंजाब जैसे कृषि-प्रधान राज्यों में लाखों मजदूर इससे जुड़ चुके हैं। यह कार्ड न केवल सुरक्षा देता है, बल्कि भविष्य की योजनाओं का गेटवे भी है। लेकिन अफवाहों से बचें। ग्राम पंचायतें और एनजीओ जागरूकता अभियान चला रही हैं। महिलाओं और युवा श्रमिकों को प्राथमिकता मिल रही है। सरकार को चाहिए कि पारदर्शी अपडेट्स जारी करे, ताकि भ्रम न फैले। असंगठित अर्थव्यवस्था की रीढ़ इन मजदूरों का कल्याण राष्ट्र निर्माण का आधार है। कार्ड बनवाएं, लाभ लें, लेकिन सतर्क रहें।
















