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काली या सफेद? किस रंग की कार में लगती है ज्यादा गर्मी? वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाले टेस्ट के बाद खोल दिया असली राज

गर्मी में पार्क करो तो काली कार भट्टी बन जाती है या सफेद? वैज्ञानिक टेस्ट से चौंकाने वाला सच सामने आया 10-20 डिग्री का फर्क! अंडे पक गए काली में, सफेद ठंडी रही। कौन सा रंग बचेगा ईंधन और दे आराम? पूरी हकीकत जानो, न चूके सही चुनाव!

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गर्मियों में धूप कहर बरपाती है तो कार का अंदर का तापमान भट्टी जैसा हो जाता है। हर कोई यही सोचता है कि काली कार ज्यादा गर्म होगी या सफेद। सालों से चला आ रहा ये सवाल अब वैज्ञानिक परीक्षणों से सुलझ चुका है। नतीजे साफ कहते हैं कि काला रंग सूरज की गर्मी को तेजी से सोख लेता है, जबकि सफेद उसे बाहर ही धकेल देता है। गर्म इलाकों में रहने वाले ड्राइवरों के लिए ये चुनाव सिर्फ दिखावे का नहीं, बल्कि आराम, ईंधन बचत और सेहत का मामला है।

काली या सफेद? किस रंग की कार में लगती है ज्यादा गर्मी? वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाले टेस्ट के बाद खोल दिया असली राज

विज्ञान कहता क्या है गर्मी के बारे में?

सूर्य की किरणें दो तरह की होती हैं, एक दिखने वाली रोशनी और दूसरी अदृश्य इन्फ्रारेड जो सीधी गर्मी पैदा करती है। काला रंग इन किरणों में से लगभग पूरी रोशनी सोख लेता है, यानी 90 फीसदी से ज्यादा। दूसरी तरफ सफेद रंग ज्यादातर रोशनी को वापस परावर्तित कर देता है। नतीजा ये होता है कि काली कार की बाहरी चादर पल भर में तप जाती है। ये गर्मी धातु के जरिए अंदर तक पहुंचती है और केबिन को ओवन बना देती है। खासकर दोपहर की तेज धूप में जब तापमान 40 डिग्री के पार हो तो फर्क और साफ दिखता है। सफेद कार इस मामले में कहीं ज्यादा समझदारी वाली पसंद साबित होती है।

टेस्ट में सामने आया चौंकाने वाला अंतर

वैज्ञानिकों ने एक जैसे दो वाहनों पर असली परीक्षण किए। एक काली और दूसरी सफेद रंग की। इन्हें सीधी धूप में एक घंटे के लिए पार्क किया गया। एक घंटे बाद काली कार के अंदर का तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि सफेद में ये 45 डिग्री पर रुका। अंदर रखे अंडों का हाल देखिए, काली कार में वो आधे पक चुके थे लेकिन सफेद वाली में बिल्कुल सामान्य। एसी चलाने पर भी काली में ठंडक आने में ज्यादा वक्त लगा। ऐसे कई प्रयोग बताते हैं कि गहरा रंग न सिर्फ गर्मी बढ़ाता है बल्कि ठंडक पहुंचाने वाले सिस्टम पर बोझ भी डालता है। इससे पेट्रोल या डीजल की खपत बढ़ जाती है।

सभी रंगों का आपस में मुकाबला

रंगों को तीन हिस्सों में बांटें तो फर्क साफ हो जाता है। गहरे रंग जैसे काला, गहरा नीला या लाल सबसे ज्यादा गर्मी सोखते हैं। हल्के रंग सफेद, चांदी या क्रीम न्यूनतम गर्मी लेते हैं। बीच के रंग जैसे हल्का ग्रे ठीकठाक रहते हैं लेकिन सफेद जितने प्रभावी नहीं। गर्मी सोखने की क्षमता के लिहाज से काला सबसे ऊपर है, सफेद सबसे नीचे। भारतीय सड़कों पर जहां ट्रैफिक जाम और पार्किंग की मारामारी रहती है, वहां हल्का रंग चुनना बुद्धिमानी है।

भारत में क्यों जरूरी है सही चुनाव?

उत्तराखंड जैसे जगहों पर जहां गर्मी 45 डिग्री को पार कर जाती है, कार का रंग बड़ा फैसला बन जाता है। गर्म केबिन से न सिर्फ ड्राइविंग असहज होती है बल्कि थकान और स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ते हैं। ईंधन की बचत के साथसाथ रखरखाव का खर्च भी कम होता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि नई कार लेते समय सफेद या हल्के रंग को प्राथमिकता दें। साथ ही खिड़की पर टिंट लगवाएं, छायादार जगह पर पार्क करें। ये आसान उपाय 20 फीसदी तक एसी का लोड हल्का कर देते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के जमाने में ये और सख्त जरूरत है क्योंकि गर्मी बैटरी को नुकसान पहुंचाती है।

अंतिम सलाह

काली कार का शौक हो तो भी सोचें, गर्मी की मार लंबे समय तक सही नहीं लगती। सफेद रंग न सिर्फ किफायती है बल्कि टिकाऊ भी। विज्ञान और तजुर्बे दोनों यही कहते हैं कि हल्का रंग गर्मी का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगली बार शोरूम में कदम रखें तो ये हकीकत याद रखें। सुरक्षित ड्राइविंग और ठंडक भरी यात्रा के लिए सही रंग ही चाबी है।

Author
info@ortpsa.in

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