
मध्य प्रदेश के किसानों और भू-स्वामियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है, मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, अब सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे पर किसानों को एक रुपया भी टैक्स नहीं देना होगा, सरकार के इस कदम से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुँचेगा।
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मुआवजा हुआ 100% टैक्स फ्री
नए प्रावधानों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले नियमों के तहत, RFCTLARR एक्ट (भूमि अधिग्रहण अधिनियम) के अंतर्गत मिलने वाली पूरी मुआवजा राशि अब आयकर (Income Tax) के दायरे से बाहर होगी, पहले केवल ग्रामीण कृषि भूमि पर ही यह छूट मिलती थी, लेकिन अब सरकार ने शहरी और व्यावसायिक जमीन के अनिवार्य अधिग्रहण पर भी ‘कैपिटल गेन्स टैक्स’ को पूरी तरह खत्म कर दिया है, यानी अब मुआवजे का पूरा पैसा सीधे किसान की जेब में जाएगा।
मुआवजे की राशि हुई दोगुनी
मध्य प्रदेश सरकार ने केवल टैक्स में राहत ही नहीं दी है, बल्कि मुआवजे की दर को भी बढ़ा दिया है, अब बंजर या उपजाऊ, किसी भी प्रकार की जमीन का अधिग्रहण होने पर कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर दोगुना मुआवजा दिया जाएगा, इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी जमीन हाईवे, एक्सप्रेसवे या मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए ली जाती है।
हाई टेंशन लाइन के मुआवजे में बंपर बढ़ोत्तरी
बिजली विभाग के प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सरकार ने बड़ा दिल दिखाया है। खेतों से गुजरने वाली 66 केवी या उससे अधिक की हाई टेंशन लाइनों के कारण प्रभावित होने वाली जमीन के मुआवजे को 85% से बढ़ाकर सीधा 200% कर दिया गया है। यानी अब टावर लगाने या तार बिछाने पर किसानों को पहले के मुकाबले दो गुने से भी ज्यादा रकम मिलेगी।
क्या है पेच?
खबर में ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्य मुआवजा राशि तो टैक्स-फ्री है, लेकिन यदि मुआवजे के भुगतान में देरी होती है और उस पर ब्याज (Interest) मिलता है, तो उस ब्याज को ‘अन्य स्रोतों से आय’ मानकर उस पर टैक्स देना होगा। साथ ही, यह छूट केवल अनिवार्य सरकारी अधिग्रहण पर लागू है, निजी सौदों (Private Sale) पर नहीं।
इस फैसले के बाद से प्रदेश भर के किसान संगठनों में खुशी की लहर है और इसे किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
















