
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेघर परिवारों को छत मुहैया कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, इस नई सूची में निराश्रित विधवा महिलाओं को सबसे ऊपर (टॉप प्रायोरिटी) रखा गया है, ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सबसे पहले सुरक्षित आश्रय मिल सके।
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विधवा महिलाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 18 से 50 वर्ष की आयु की ऐसी विधवा महिलाएं, जिनका कोई सहारा नहीं है, उन्हें चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जा रही है, इसके साथ ही मुसहर, वनटांगिया, नट, सपेरा, कोल और सहरिया जैसी पिछड़ी जातियों सहित दिव्यांगजनों और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों को भी इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा।
कैसे हो रहा है पात्रों का चयन? (Selection Criteria)
ग्राम्य विकास विभाग ने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) को सर्वे के निर्देश जारी कर दिए हैं, चयन के लिए निम्नलिखित मानक तय किए गए हैं:
- आय सीमा: आवेदक के परिवार की कुल वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- आवासीय स्थिति: जिनके पास रहने के लिए अपना पक्का मकान नहीं है, केवल उन्हीं के नामों पर विचार किया जाएगा।
- सरकारी लाभ से वंचित: यदि किसी को पहले प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है, तो वह इस सूची से बाहर होगा।
- अपात्रता: आयकर दाता (Income Tax Payers) और सरकारी कर्मचारी इस योजना के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
सर्वे और सत्यापन की प्रक्रिया
गांव-गांव जाकर पात्र परिवारों की पहचान के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, सर्वे के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर सूची तैयार की जाती है, जिसे बाद में ब्लॉक और जिला स्तर पर सत्यापित (Verify) किया जाता है, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल पोर्टल से जोड़ा गया है।
लिस्ट में नाम देखने का तरीका
लाभार्थी मुख्यमंत्री आवास योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmayg.nic.in पर जाकर ‘Reports’ सेक्शन के माध्यम से अपना नाम चेक कर सकते हैं, इसके लिए आपको अपने राज्य, जिले और ब्लॉक का चयन करना होगा। इसके अलावा, ग्रामीण अपने क्षेत्र के ग्राम प्रधान या सचिव से भी सूची की जानकारी ले सकते हैं।
जरुरी दस्तावेज
आवेदन या सत्यापन के समय लाभार्थियों के पास आधार कार्ड, पति का मृत्यु प्रमाण पत्र (विधवा श्रेणी हेतु), आय प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक का होना अनिवार्य है। सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही पात्रों को किश्त जारी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाए।
















