ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले लाखों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है। सरकार ने चारा काटने की मशीन खरीदने पर भारी छूट की घोषणा की है, जिससे यह उपयोगी उपकरण हर छोटे किसान की पहुंच में आ गया है। पहले जहां बाजार से यह मशीन 7 से 10 हजार रुपये में मिलती थी, वहां अब सरकारी मदद से इसे महज 3 से 4 हजार रुपये में घर लाया जा सकता है। यह कदम पशुपालन को आसान बनाने और किसानों की मेहनत बचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

पशुपालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हाथ से चारा काटना न केवल समय लेने वाला है, बल्कि श्रमसाध्य भी। नई मशीन से चारा बारीक कटकर पशुओं के पाचन को बेहतर बनाता है, जिससे दूध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है। छोटे और सीमांत किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग, महिलाएं तथा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार इस योजना के प्रमुख लाभार्थी हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक से पशुपालन को व्यवसायिक स्तर पर ले जाया जाए, ताकि आय में स्थिरता आए।
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कितनी मिलेगी छूट और कैसे लाभ लें?
इस योजना में मशीन की कीमत पर 50 से 80 प्रतिशत तक की सहायता दी जा रही है। हाथ से चलने वाली मशीनों पर अधिकतम राहत है, जबकि बिजली वाली मॉडल पर भी अच्छी छूट उपलब्ध है। कुल लागत का बड़ा हिस्सा सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित हो जाता है। पशुपालकों को कम पैसे खर्च कर आधुनिक उपकरण मिलने से न केवल दैनिक खर्च घटेगा, बल्कि पशुओं की सेहत में भी सुधार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे ग्रामीण महिलाओं का कार्यभार आधा हो जाएगा, जो मुख्य रूप से पशुपालन का काम संभालती हैं।
कौन बन सकता है हकदार?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ बुनियादी शर्तें पूरी करनी होंगी। आवेदक पशुपालक होना चाहिए, जिसके पास कम से कम एक-दो पशु हों। पहले से सरकारी सहायता पर ली गई कोई चारा काटने की मशीन नहीं होनी चाहिए। पंजाब जैसे राज्यों में स्थानीय पशुपालन विभाग की योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है। सीमांत किसानों को विशेष कोटा मिलता है, और चयन ड्रॉ या सत्यापन प्रक्रिया से होता है। कोटा सीमित होने से जल्द आवेदन करना जरूरी है।
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आवेदन की सरल प्रक्रिया
प्रक्रिया को बेहद आसान बनाया गया है। सबसे पहले अपने राज्य के पशुपालन या कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां नए उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण कराएं, जिसमें मोबाइल नंबर और ईमेल की जरूरत पड़ेगी। फॉर्म भरते समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमाबंदी नकल, पशु प्रमाण पत्र तथा पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करें। मशीन का कोटेशन अधिकृत विक्रेता से प्राप्त कर संलग्न करें। फॉर्म जमा करने के बाद विभाग सत्यापन करेगा। स्वीकृति मिलने पर मशीन खरीदें और बिल जमा करें। 15 से 30 दिनों में राशि खाते में आ जाएगी। नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या ई-मित्र केंद्र से भी मदद ली जा सकती है।
किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
अमृतसर के एक पशुपालक ने बताया कि मशीन मिलने से चारा तैयार करने में घंटों की बचत हुई और दूध बिक्री से मासिक आय बढ़ गई। कई किसान कहते हैं कि यह योजना उनकी जिंदगी बदल रही है। सरकार ने 2026-27 के बजट में इसकी राशि बढ़ाई है, लेकिन जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि कोई लाभ से वंचित न रहे।
पशुपालक भाइयों, यह सुनहरा अवसर हाथ से न जाने दें। स्थानीय कार्यालय से संपर्क कर आज ही आवेदन शुरू करें। आधुनिक पशुपालन से समृद्ध ग्रामीण भारत का सपना साकार होगा।
















