केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक ऐसा कदम उठाया है, जो परीक्षा की घुटन भरी तैयारी में राहत की सांस देगा। मुख्य बोर्ड परीक्षा के बाद अब सप्लीमेंट्री परीक्षा में नंबर सुधारने का शानदार विकल्प मिलेगा। फेल छात्रों के लिए कंपार्टमेंट का रास्ता तो था ही, अब पास छात्र भी एक विषय चुनकर अपना स्कोर ऊंचा कर सकेंगे। यह बदलाव छात्रों को मुख्य परीक्षा में लापरवाही से बचाने और जिम्मेदारी सिखाने वाला है। 18 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षाओं के ठीक पहले आई यह खबर अभिभावकों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है।

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सप्लीमेंट्री नियमों में बड़ा फेरबदल
पहले सप्लीमेंट्री परीक्षा मुख्य रूप से फेल विषयों के लिए सीमित थी। लेकिन अब इसमें इंप्रूवमेंट का द्वार खुल गया है। नए नियम सरल हैं। छात्र मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद केवल एक विषय में ही सुधार परीक्षा दे सकेंगे। अगर प्रदर्शन अच्छा रहा, तो नया बेहतर स्कोर मान्य होगा। पुराने नंबरों का मार्कशीट भी सुरक्षित रहेगा, ताकि छात्र अपनी सुविधा से चुन सकें। यह सुविधा कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए दो विषयों तक उपलब्ध है, लेकिन 12वीं में सख्ती बरती गई है। बोर्ड का मानना है कि इससे छात्र पहले ही प्रयास में पूरा जोर लगाएंगे।
परीक्षा का पूरा शेड्यूल
मुख्य परीक्षा का रिजल्ट मई के मध्य तक आने की उम्मीद है। इसके तुरंत बाद सप्लीमेंट्री के लिए आवेदन खिड़की खुलेगी। परीक्षा जुलाई के मध्य में प्रस्तावित है, संभवतः 15 तारीख के आसपास। नया रिजल्ट अगस्त तक घोषित हो जाएगा। इससे कॉलेज एडमिशन में कोई देरी नहीं होगी। आवेदन बोर्ड की वेबसाइट पर आसानी से हो जाएगा। फीस मामूली होगी और सर्कुलर में सारी डिटेल्स स्पष्ट होंगी। छात्रों को सलाह है कि रिजल्ट घोषणा के बाद तुरंत अपडेट चेक करें।
कौन ले सकता है लाभ?
यह मौका सभी के लिए है। मुख्य परीक्षा में पास हो चुके छात्र जो किसी एक विषय में थोड़ा और स्कोर चाहते हैं, वे इंप्रूवमेंट चुन सकते हैं। फेल छात्र कंपार्टमेंट परीक्षा देकर अगले चरण में बढ़ सकेंगे। हर विषय में थ्योरी और प्रैक्टिकल के लिए अलग-अलग न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक जरूरी रहेंगे। बोर्ड नया मार्कशीट जारी करेगा, जिसमें बेहतर प्रदर्शन दर्ज होगा। अगर एक से ज्यादा विषयों में सुधार चाहिए, तो अगले साल प्राइवेट कैंडिडेट बनकर मुख्य परीक्षा देनी पड़ेगी। यह नियम छात्रों को साल भर का इंतजार करने पर मजबूर कर सकता है, इसलिए सतर्क रहें।
छात्रों और अभिभावकों पर असर
शिक्षा जगत में इस बदलाव को सकारात्मक माना जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे छात्रों में अनुशासन आएगा और मुख्य परीक्षा को गंभीरता से लिया जाएगा। एक प्रमुख स्कूल प्रमुख ने टिप्पणी की, छात्र अब बहाने नहीं बनाएंगे, बल्कि तैयारी पर फोकस करेंगे। अभिभावक उत्साहित हैं, क्योंकि जल्द रिजल्ट से करियर प्लानिंग आसान हो जाएगी। हालांकि कुछ छात्र संगठन एक विषय की सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि कई विषयों में कमजोरी सामान्य है। फिर भी बोर्ड का इरादा स्पष्ट है, गुणवत्ता सुधारना।
तैयारी के लिए खास टिप्स
मुख्य परीक्षा से पहले कमजोर विषयों पर पकड़ मजबूत करें। नियमित रिवीजन और मॉक टेस्ट जरूरी। सप्लीमेंट्री को सेकंड चांस न समझें, बल्कि बोनस मानें। अभिभावक बच्चों का हौसला बढ़ाएं। बोर्ड की वेबसाइट पर नजर रखें। यह बदलाव न केवल फेल का डर मिटाएगा, बल्कि छात्रों को नई ऊर्जा देगा। 2026 की बोर्ड परीक्षा अब सफलता की नई कहानी लिखने को तैयार है। सफलता की शुभकामनाएं!
















