
आज के दौर में जहाँ दुनिया 5G और हाई-स्पीड इंटरनेट की बात कर रही है, वहीं एक ऐसा गाँव भी है जहाँ लोग आज भी 18वीं सदी जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं, दक्षिण अमेरिका के उरुग्वे (Uruguay) में स्थित काबो पोलोनियो (Cabo Polonio) एक ऐसी जगह है, जो अपनी खूबसूरती के लिए जितनी मशहूर है, अपनी सुख-सुविधाओं की कमी के लिए उतनी ही चर्चा में रहती है, इस गाँव में न तो बिजली की लाइनें हैं और न ही पाइप के जरिए पानी की सप्लाई होती है।
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मोबाइल चार्जिंग के लिए लंबी कतारें
हैरानी की बात यह है कि इस ‘ऑफ-ग्रिड’ गाँव में मोबाइल नेटवर्क तो है, लेकिन उसे चार्ज करने के लिए बिजली नहीं, यहाँ के निवासी और पर्यटक अपना फोन चार्ज करने के लिए स्थानीय किराना स्टोर पर निर्भर रहते हैं, जहाँ एक छोटा सा जनरेटर चलाया जाता है, लोग घंटों अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं ताकि उनके फोन की बैटरी थोड़ी चार्ज हो सके, रात के समय यहाँ का नज़ारा बिल्कुल अलग होता है; पूरा गाँव मोमबत्तियों और लालटेन की रोशनी में डूब जाता है।
बिना बुनियादी सुविधाओं के कैसे कटती है ज़िंदगी?
- बिजली का विकल्प: रोशनी के लिए मोमबत्तियाँ और कुछ घरों में निजी सौर पैनल (Solar Panels) या विंड टर्बाइन का इस्तेमाल होता है।
- पानी का संकट: नलों में बहता पानी यहाँ एक सपना है, लोग कुओं से पानी निकालते हैं या बारिश के पानी को सहेजकर अपनी जरूरतें पूरी करते हैं।
- सड़कों का अभाव: यहाँ तक पहुँचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, मुख्य मार्ग से 7 किलोमीटर दूर इस गाँव तक केवल विशेष 4×4 ट्रकों या पैदल ही पहुँचा जा सकता है।
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भारत में भी कम नहीं है संघर्ष
काबो पोलोनियो जैसी ही स्थिति भारत के कुछ हिस्सों में भी देखी गई है, बिहार के बगहा जिले के झंडवा टोला गाँव के लोग आज भी बिजली के लिए तरस रहे हैं, यहाँ के ग्रामीणों को अपना मोबाइल चार्ज करने के लिए हर दिन पैदल चलकर सीमा पार नेपाल के सुस्ता गाँव जाना पड़ता है।
इसी तरह, झारखंड के हजारीबाग जिले के
पंडानवाटंड गाँव में युवा मोबाइल चार्ज करने के लिए हाईवे पर खड़े होकर कोयले के ट्रकों का इंतज़ार करते हैं, ताकि उनके डैशबोर्ड चार्जर का उपयोग कर सकें, राजस्थान के बाड़मेर में बच्चियां गांव के हालात भी ऐसे ही हैं, जहाँ बिजली-पानी न होने के कारण लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
















