आज के डिजिटल दौर में एटीएम से बार-बार थोड़े-थोड़े पैसे निकालना आम आदत बन चुकी है, लेकिन आरबीआई के नए नियमों ने लाखों ग्राहकों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। मई 2025 से लागू इन बदलावों के बाद फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा इतनी सख्त हो गई है कि अतिरिक्त निकासी पर हर बार 23 रुपये तक का भारी चार्ज कटने लगा है। अगर आप भी रोजाना एटीएम की दौड़ लगा रहे हैं, तो जेब पर असर पड़ना तय है।

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फ्री ट्रांजैक्शन की सख्त सीमा क्या कहती है?
मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में ग्राहक प्रति माह केवल 3 फ्री ट्रांजैक्शन ही कर पाते हैं। गैर-मेट्रो इलाकों में यह संख्या 5 तक सीमित है। ध्यान दें, यह सीमा दूसरे बैंकों के एटीएम पर लागू होती है। अपने बैंक के एटीएम पर ज्यादातर मामलों में अनलिमिटेड फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा मिलती रहती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट या छोटी निकासी भी फ्री काउंट में जुड़ जाती है। लिमिट खत्म होते ही हर अगले ट्रांजैक्शन पर 23 रुपये प्लस जीएसटी का चार्ज लग जाता है, जो पहले 21 रुपये था।
बैंक और कार्ड पर निर्भर
एटीएम से एक बार में कितने पैसे निकाल सकते हैं, यह डेबिट कार्ड के प्रकार पर तय होता है। बेसिक या क्लासिक कार्ड पर 10,000 से 40,000 रुपये तक की दैनिक सीमा रहती है। रुपे या वीजा प्लेटिनम कार्ड वाले 50,000 से 75,000 रुपये निकाल पाते हैं, जबकि प्रीमियम या सिग्नेचर कार्ड पर 1 लाख या उससे अधिक की लिमिट मिल जाती है। कुछ प्रीमियम खातों में यह 2 लाख तक जाती है। नए खातों पर पहली छह महीने सख्ती ज्यादा रहती है। कुल मिलाकर, कई एटीएम से निकासी जोड़कर दैनिक लिमिट तय होती है।
चार्ज से कैसे बचें? आसान टिप्स
सबसे पहला उपाय है योजना बनाना। महीने की शुरुआत में जरूरत का सही आकलन करें और कम से कम बार एटीएम जाएं। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग या नेट बैंकिंग का ज्यादा इस्तेमाल करें, जो पूरी तरह फ्री हैं। हमेशा अपने बैंक के एटीएम चुनें जहां फ्री लिमिट का बोझ नहीं पड़ता। बैंक ऐप से नियमित रूप से अपनी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट और दैनिक कैश लिमिट चेक करते रहें। अगर जरूरत ज्यादा है, तो प्रीमियम डेबिट कार्ड के लिए अपग्रेड करवाएं, लेकिन उसके शुल्क की पहले जानकारी लें।
आरबीआई का मकसद और आगे की राह
आरबीआई ने यह बदलाव बैंकों के बढ़ते रखरखाव खर्चों को कवर करने के लिए किया है। एटीएम नेटवर्क को मजबूत रखने के साथ ग्राहकों को डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर प्रोत्साहित करना भी उद्देश्य है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में जहां एटीएम कम हैं, वहां यह नियम परेशानी बढ़ा सकता है। सरकार और बैंक अब जागरूकता अभियान चला रहे हैं। सतर्क रहें, क्योंकि छोटी सी आदत आपकी जेब को महंगा पड़ सकती है। स्मार्ट बनें, डिजिटल रहें!
















