Join Contact

ATM से पैसा निकालना होगा महंगा! महीने में कितनी बार मिलेगा फ्री ट्रांजेक्शन? जान लें बैंकों का नया नियम

अब अपने बैंक ATM पर सिर्फ 5 फ्री, दूसरे बैंक पर 3 ही मिलेंगे। ज्यादा निकाला तो हर बार 23 रुपये कटेंगे! RBI का नया नियम आपकी जेब पर भारी, यूपीआई यूज करो वरना परेशानी। जल्दी जान लो ये नियम!

Published On:

रोजमर्रा के लेन-देन में एटीएम का सहारा लेने वाले लाखों ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने एटीएम नियमों में सख्ती बरतते हुए फ्री ट्रांजेक्शन की सीमा तय कर दी है। इसका असर सीधे जेब पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो बार-बार कैश निकालते हैं। यह बदलाव पिछले साल मई से लागू हुआ है और अब तक पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ATM से पैसा निकालना होगा महंगा! महीने में कितनी बार मिलेगा फ्री ट्रांजेक्शन? जान लें बैंकों का नया नियम

फ्री लिमिट का नया ढांचा

अब अपने बैंक के एटीएम पर महीने भर में सिर्फ पांच मुफ्त लेन-देन की अनुमति है। इसमें कैश निकासी से लेकर बैलेंस जांच और मिनी स्टेटमेंट जैसी सभी गतिविधियां आती हैं। अगर कोई इससे एक भी ज्यादा ट्रांजेक्शन करता है, तो अतिरिक्त शुल्क लग जाता है। दूसरे बैंकों के एटीएम पर यह सीमा और भी कम है। महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई या चेन्नई में केवल तीन फ्री ट्रांजेक्शन मिलते हैं, जबकि अन्य शहरों और कस्बों में पांच तक। पंजाब जैसे राज्य में जहां एटीएम की संख्या अच्छी है, फिर भी लोग दूसरे बैंकों के मशीनों पर निर्भर रहते हैं।

बढ़े हुए शुल्क का बोझ

फ्री सीमा पार होते ही हर अतिरिक्त कैश निकासी पर करीब 23 रुपये का चार्ज लगता है, जिसमें कर भी शामिल है। पहले यह राशि थोड़ी कम थी, लेकिन अब बढ़ा दी गई है। वहीं बैलेंस चेक या अन्य छोटे-मोटे कामों पर 11 रुपये का खर्च आता है। ये पैसे सीधे खाते से कट जाते हैं, बिना किसी पूर्व सूचना के। बड़े बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सैलरी खाताधारकों के लिए जो पहले असीमित मुफ्त सुविधा देते थे, उसे भी सीमित कर दिया है। अब उनके पास भी तय संख्या के बाद शुल्क लागू हो जाता है। लुधियाना के बाजारों में दुकानदारों और मजदूर वर्ग को इससे सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

बदलाव की मुख्य वजहें

बैंकों की बढ़ती रखरखाव लागत और डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन देने के पीछे यह कदम उठाया गया है। एटीएम मशीनों का संचालन महंगा पड़ रहा है, जबकि यूपीआई जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में अभी भी कैश की जरूरत ज्यादा है, लेकिन शहरों में लोग धीरे-धीरे मोबाइल बैंकिंग की ओर मुड़ रहे हैं। फाइनेंशियल जानकारों का मानना है कि इससे बैंकों का खर्च संतुलित होगा, लेकिन छोटे ग्राहकों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा। पंजाब के औद्योगिक हब लुधियाना में जहां रोजगार पर निर्भर लोग रहते हैं, वहां प्रतिक्रिया तीखी है। एक स्थानीय व्यापारी ने बताया कि महीने में आठ-दस बार कैश निकालना पड़ता है, जिससे अब अतिरिक्त 200 रुपये का नुकसान हो जाता है।

ग्राहकों को क्या करें?

इस स्थिति से बचने के लिए सबसे आसान तरीका है अपने बैंक का ऐप या यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल। ये विकल्प पूरी तरह मुफ्त हैं और तुरंत काम करते हैं। महीने की शुरुआत में ही ट्रांजेक्शन का हिसाब रखें, ताकि लिमिट न लांघें। पास के अपने बैंक वाले एटीएम का चयन करें और सैलरी खाते की शर्तें जांच लें। कुछ बैंकों में विशेष सुविधाएं अभी भी उपलब्ध हैं। आरबीआई ने सभी बैंकों को ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट भेजने का निर्देश दिया है, जिससे लोग सतर्क रह सकें।

आगे की राह

यह बदलाव बैंकिंग को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन आम आदमी की सुविधा सुनिश्चित करनी होगी। लुधियाना में जल्द ही बैंकिंग जागरूकता मीटिंग होने वाली है, जहां लोग अपनी बात रख सकेंगे। कुल मिलाकर, डिजिटल इंडिया की यह पहल स्वागतयोग्य है, परंतु ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है। समय रहते आदत बदलें, वरना जेब ढीली होने का सिलसिला जारी रहेगा।

Author
info@ortpsa.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार