वैश्विक समुद्री शक्ति की दौड़ में नौसेनाएं अब देशों की रणनीतिक ताकत का प्रतीक बन चुकी हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका अपनी विशाल और अत्याधुनिक बेड़े के साथ दुनिया की नंबर एक नौसेना बना हुआ है। इसके विपरीत भारत अपनी बढ़ती क्षमता के बावजूद सातवें पायदान पर कायम है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच यह स्थिति भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही है।

Table of Contents
अमेरिका की अपराजेय ताकत
अमेरिकी नौसेना का दबदबा निर्विवाद है। उसके पास ग्यारह न्यूक्लियर संचालित विमानवाहक पोत हैं जो वैश्विक स्तर पर तैनाती की अनुमति देते हैं। इनमें यूएसएस निमित्ज और यूएसएस फोर्ड जैसे विशालकाय जहाज शामिल हैं। कुल दो सौ बत्तीस युद्धपोतों की फ्लीट के साथ अमेरिका न केवल संख्या में आगे है बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता में भी सबसे ऊपर है। यह नौसेना प्रशांत से अटलांटिक तक अपनी पहुंच बनाए रखती है और सहयोगी देशों को सुरक्षा का भरोसा दिलाती है।
चीन का तेज उभार
दूसरे स्थान पर चीन ने पिछले एक दशक में जबरदस्त प्रगति की है। उसके पास चार सौ पांच युद्धपोत हैं जो संख्या के लिहाज से दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। टाइप 003 जैसे पारंपरिक विमानवाहक पोत और हाइपरसोनिक मिसाइलों ने इस नौसेना को खतरनाक बना दिया है। दक्षिण चीन सागर में आक्रामक रुख अपनाते हुए चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना वर्चस्व बढ़ा रहा है। भारत के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि पड़ोसी देश की महत्वाकांक्षाएं सीधे हिंद महासागर को प्रभावित कर रही हैं।
रूस और अन्य उभरते खिलाड़ी
तीसरे पायदान पर रूस अपनी न्यूक्लियर पनडुब्बियों और एंटी-शिप मिसाइलों के दम पर मजबूत है। किंझल जैसी हथियार प्रणाली इसे घातक बनाती है। चौथे स्थान पर इंडोनेशिया ने चौंकाया है। दो सौ पैंतालीस युद्धपोतों के साथ यह दक्षिण-पूर्व एशिया का नया केंद्र बन रहा है। पांचवें नंबर पर दक्षिण कोरिया अपनी आधुनिक फ्लीट से जापान और चीन को टक्कर दे रहा है। ये देश संख्या और तकनीक के संतुलन से वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं।
यह भी पढ़ें- UP के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! ‘कौशल कनेक्ट सेल’ से अब अपने ही जिले में मिलेगी मनचाही नौकरी
भारत की स्थिति और भविष्य की राह
भारतीय नौसेना सातवें स्थान पर है लेकिन गुणवत्ता में पीछे नहीं। आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत जैसे दो विमानवाहक पोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां और पी-8आई निगरानी विमान इसे शक्तिशाली बनाते हैं। हिंद महासागर में पिरामिड ऑफ पावर रणनीति से भारत चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स को जवाब दे रहा है। फिर भी संख्या में पिछड़ना चिंता का विषय है। सरकार ने आगामी बजट में नौसेना के लिए पच्चीस प्रतिशत अधिक धन आवंटित किया है। प्रोजेक्ट 75आई के तहत नई पनडुब्बियां और तीसरा विमानवाहक पोत रास्ते में हैं।
समुद्री सुरक्षा का वैश्विक महत्व
दुनिया का नब्बे प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। इसलिए नौसेनाओं की ताकत आर्थिक स्थिरता से जुड़ी है। भारत के लिए हिंद-प्रशांत में शांति बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले पांच वर्षों में भारत टॉप पांच में जगह बना सकता है यदि निर्माण की गति तेज हुई। नई दिल्ली को न केवल संख्या बढ़ानी होगी बल्कि ड्रोन और साइबर क्षमताओं पर भी ध्यान देना होगा। यह रैंकिंग भारत को अपनी समुद्री सीमाओं को अभेद्य बनाने का संकेत दे रही है।
















