
देश में आधार कार्ड और वोटर आईडी दोनों ही नागरिकों की प्राथमिक पहचान के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। जहां आधार हर क्षेत्र में अनिवार्य होता जा रहा है- स्कूल प्रवेश से लेकर बैंक खाता खोलने और सरकारी योजनाओं के लाभ तक – वहीं वोटर आईडी लोकतंत्र का आधार है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक मैसेज ने लाखों वोटरों में भ्रम पैदा कर दिया है।
दावा किया जा रहा है कि चुनाव कानून (संशोधन) बिल 2021 के तहत वोटर आईडी को आधार से लिंक न करने पर नाम मतदाता सूची से कट जाएगा। क्या यह सच है? PIB फैक्ट चेक और चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति से साफ है कि यह पूरी तरह फर्जी है।
Table of Contents
वायरल मैसेज में क्या कहा गया?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक मैसेज तेजी से फैल रहा है, जो कथित तौर पर चुनाव आयोग के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से आया बताया जा रहा है। इसमें लिखा है: “चुनाव कानून (संशोधन) बिल, 2021 के अनुसार, वोटर आईडी को आधार से लिंक करना अनिवार्य है। लिंक न करने पर आपका नाम मतदाता सूची से हट जाएगा। तुरंत वोटर हेल्पलाइन ऐप डाउनलोड करें या 1950 पर कॉल करें।” यह मैसेज फर्जी ट्विटर हैंडल से प्रसारित हो रहा है और लोगों को डराने का काम कर रहा है। कई BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) फोन कॉल्स के जरिए जागरूकता फैला रहे हैं, जिसे कुछ लोग धमकी समझ रहे हैं।
PIB फैक्ट चेक का खुलासा
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के फैक्ट चेक विंग ने इस मैसेज की बारीकी से जांच की। 5 फरवरी 2026 को जारी उनके बयान में साफ कहा गया कि यह मैसेज फेक है और इसका उद्देश्य फ्रॉड या डेटा चोरी हो सकता है। PIB ने पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने कभी भी आधार-वोटर आईडी लिंकिंग को अनिवार्य नहीं बनाया। यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक है। चुनाव आयोग ने भी 2022 से लगातार स्पष्ट किया है कि Form 6B के जरिए seeding वैकल्पिक है। आधार न जोड़ने पर वोटिंग अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता।
चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति
चुनाव कानून (संशोधन) बिल 2021 ने EPIC (Electoral Photo Identity Card) को आधार से लिंक करने की सुविधा दी, ताकि डुप्लिकेट वोटरों को रोका जा सके। लेकिन आयोग ने राज्यों को निर्देश दिए कि यह जबरन नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप, वोटर अपनी सहमति से लिंक करा सकते हैं। हाल के फैक्ट चेक में (मार्च 2025 तक) आयोग ने दोहराया कि नाम मतदाता सूची में होने पर आधार, पासपोर्ट या अन्य वैध ID से वोट डाला जा सकता है। 2026 में भी यही नीति बरकरार है।
PAN से तुलना क्यों गलत?
लोग PAN-आधार लिंकिंग की याद से भ्रमित हो रहे हैं, जहां 31 मार्च 2022 के बाद अनलिंक्ड PAN निष्क्रिय हो गए। लेकिन वोटर आईडी का मामला अलग है। PAN फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन से जुड़ा है, जबकि वोटिंग संवैधानिक अधिकार। केंद्र ने PAN के लिए सख्त गाइडलाइन जारी कीं, लेकिन वोटर लिंकिंग के लिए कोई डेडलाइन या पेनल्टी नहीं है।
लिंक कैसे करें, अगर इच्छा हो?
चाहें तो वोटर हेल्पलाइन ऐप, 1950 नंबर या voters.eci.gov.in पर Form 6B भरें। आधार नंबर दर्ज कर दें – यह सुरक्षित है। लेकिन न करने पर कोई समस्या नहीं। आयोग नाम साफ करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है, जिसमें आधार मददगार है, लेकिन जरूरी नहीं।
भ्रम क्यों फैल रहा?
डिजिटल इंडिया के दौर में फेक न्यूज तेजी से वायरल होती है। BLO कॉल्स जागरूकता के लिए हैं, लेकिन अस्पष्ट संवाद से डर बढ़ा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं: आधिकारिक स्रोतों- eci.gov.in या PIB – पर भरोसा करें। फर्जी ऐप्स डाउनलोड न करें।
















