देश भर में लाखों लोग सार्वजनिक भविष्य निधि यानी पीपीएफ को अपनी बचत का सबसे भरोसेमंद जरिया मानते हैं। टैक्स छूट और गारंटीड ब्याज की वजह से यह स्कीम नौकरीपेशा लोगों का पहला चुनाव बन चुकी है। लेकिन एक बड़ी चूक कई निवेशकों को महंगी पड़ रही है। क्या आप जानते हैं कि अपने नाम पर दो या इससे ज्यादा पीपीएफ खाते चलाना पूरी तरह वर्जित है। ऐसा करने पर अतिरिक्त खाते पर न तो ब्याज जुड़ेगा और न ही कोई लाभ मिलेगा। समय रहते इस गलती को न सुधारने पर आपकी मेहनत की कमाई पर पानी फिर सकता है।

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पीपीएफ के मूल नियम क्या कहते हैं
पीपीएफ योजना 1968 के अधिनियम के तहत बनी है। इसकी सबसे साफ शर्त यही है कि कोई भी व्यक्ति अपने नाम से सिर्फ एक ही खाता संचालित कर सकता है। भले ही आपने पहला खाता किसी सरकारी बैंक में खोला हो और दूसरा डाकघर या किसी अन्य बैंक में। नियम एक समान है। अगर गलती से दो खाते खुल गए तो दूसरा खाता अनियमित घोषित हो जाता है। इसका मतलब साफ है। उसमें जमा हर पैसा ब्याज रहित रहता है। वर्तमान ब्याज दर करीब सात प्रतिशत के आसपास चल रही है। सालाना डेढ लाख रुपये जमा करने पर भी दूसरा खाता बेकार साबित होता है। कई लोग बिना सोचे अलग अलग जगह खाते खोल देते हैं। नतीजा लंबे समय में बड़ा नुकसान।
टैक्स लाभ के दुरुपयोग पर लगाम
सरकार ने यह नियम इसलिए बनाया ताकि टैक्स बचत का गलत फायदा न उठाया जाए। आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत पीपीएफ में सालाना डेढ लाख तक निवेश पर छूट मिलती है। मैच्योरिटी के बाद ब्याज और मूलधन दोनों पर कोई टैक्स नहीं। कल्पना करें अगर कोई दो खातों में तीन लाख जमा कर दे तो यह सीमा टूट जाती है। ऐसी स्थिति में नुकसान दोहरा हो जाता है। खाते का ब्याज न मिलना और टैक्स छूट का इनवैलिड होना। पिछले कुछ सालों में हजारों शिकायतें सामने आई हैं। लोग अक्सर पुराना खाता भूल जाते हैं और नया खोल लेते हैं। खासकर जब वे शहर बदलते हैं या नया बैंक चुनते हैं।
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दो खाते होने पर क्या उपाय अपनाएं
अगर आपके पास एक से ज्यादा पीपीएफ खाते हैं तो तुरंत कार्रवाई करें। सबसे पहले सभी खातों का ब्यौरा जुटाएं। बैंक पासबुक या ऑनलाइन स्टेटमेंट देखें। फिर वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग से संपर्क करें। अनुमति मिलने पर मुख्य खाते में अतिरिक्त राशि स्थानांतरित करवाएं। इसके लिए फॉर्म भरना होगा। इसमें खाता नंबर जमा का विवरण और पहचान पत्र लगते हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही दूसरा खाता बंद हो जाता है। ब्याज की गणना भी नियमित शुरू हो जाती है। देरी करने से पेनल्टी लग सकती है। कभी कभी राशि जब्त भी हो जाती है। बैंक अधिकारी खुद इसकी जिम्मेदारी लेते हैं लेकिन अंत में खाताधारक को नुकसान होता है।
किन मामलों में अपवाद की छूट
हर नियम में कुछ अपवाद जरूर होते हैं। माता पिता अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर संरक्षक बनकर एक और खाता खोल सकते हैं। लेकिन बच्चा बड़ा होने पर उसके नाम सिर्फ एक ही रहेगा। गैर निवासी भारतीयों को मौजूदा खाता पांच साल तक चलाने की इजाजत है। नया खोलना मना। हिंदू अविभाजित परिवार के नाम पर भी एक ही खाता मान्य। इन अपवादों का फायदा उठाते समय भी सावधानी बरतें।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
पीपीएफ खाता खोलने से पहले चेक करें कि पहले से कोई सक्रिय तो नहीं। नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप से आसानी से पता चल जाता है। केवाईसी के दौरान बैंक वाले पूछते हैं लेकिन लापरवाही न बरतें। अगर पीपीएफ ही मुख्य निवेश है तो एनपीएस या ईपीएफ जैसे विकल्प भी देखें। नियमित समीक्षा से बचत सुरक्षित रहेगी। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी बैंक शाखा या सरकारी वेबसाइट देखें। सतर्क रहें सुरक्षित रहें।
















